भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

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पृष्ठ 1796

दूसरे बहुत-से योद्धा इन्हें देखते ही भयके मारे निष्प्राण हो गये। इस प्रकार मारी जानेपर भी वेगशाली कलिंग वीरोंकी उस विशाल वाहिनीने रणक्षेत्रमें भीष्मकी रक्षाके लिये उन्हें चारों ओरसे घेरकर पुनः भीमसेनपर धावा किया ।। ६६ १/२ ।। ततः कालिङ्गसैन्यानां प्रमुखे भरतर्षभ ।। ६७ ।। श्रुतायुषमभिप्रेक्ष्य भीमसेनः समभ्ययात् । भरतश्रेष्ठ! कलिंगसेनाके अग्रभागमें राजा श्रुतायुको देखकर भीमसेन उसका सामना करनेके लिये आगे बढ़े ।। ६७ १/२ ।। तमायान्तमभिप्रेक्ष्य कालिङ्गो नवभिः शरैः ।। ६८ ।। भीमसेनममेयात्मा प्रत्यविध्यत् स्तनान्तरे । उन्हें आते देख अमेय आत्मबलसे सम्पन्न कलिंग-राज श्रुतायुने भीमसेनकी छातीमें नौ बाण मारे ।। ६८ १/२ ।। कालिङ्गबाणाभिहतस्तोत्रार्दित इव द्विपः ।। ६९ ।। भीमसेनः प्रजज्वाल क्रोधेनाग्निरिवैधितः । कलिंगराजके बाणोंसे आहत हो भीमसेन अंकुशकी मार खाये हुए हाथीके समान क्रोधसे जल उठे, मानो घीकी आहुति पाकर आग प्रज्वलित हो उठी हो ।। ६९ १/२ ।। अथाशोकः समादाय रथं हेमपरिष्कृतम् ।। ७० ।। भीमं सम्पादयामास रथेन रथसारथिः । इसी समय भीमसेनके सारथि अशोकने एक सुवर्णभूषित रथ लेकर उसे भीमके पास पहुँचाकर उन्हें भी रथसे सम्पन्न कर दिया ।। ७० १/२ ।। तमारुह्य रथं तूर्णं कौन्तेयः शत्रुसूदनः ।। ७१ ।। कालिङ्गमभिदुद्राव तिष्ठ तिष्ठेति चाब्रवीत् । शत्रुसूदन कुन्तीकुमार भीम तुरंत ही उस रथपर आरूढ़ हो कलिंगराजकी ओर दौड़े और बोले—'अरे! खड़ा रह, खड़ा रह' ।। ७१ १/२ ।। ततः श्रुतायुर्बलवान् भीमाय निशितान् शरान् ।। ७२ ।। प्रेषयामास संक्रुद्धो दर्शयन् पाणिलाघवम् । तब बलवान् श्रुतायुने कुपित हो अपने हाथकी फुर्ती दिखाते हुए बहुत-से पैने बाण भीमसेनपर चलाये ।। ७२ १/२ ।। स कार्मुकवरोत्सृष्टैर्नवभिर्निशितैः शरैः ।। ७३ ।। समाहतो महाराज कालिङ्गेन महात्मना । संचुक्रुशे भृशं भीमो दण्डाहत इवोरगः ।। ७४ ।। महाराज! महामना कलिंगराजके द्वारा श्रेष्ठ धनुषसे छोड़े हुए नौ तीखे बाणोंसे घायल हो भीमसेन डंडेकी चोट खाये हुए सर्पकी भाँति अत्यन्त कुपित हो उठे ।। ७३-७४ ।। क्रुद्धश्च चापमायम्य बलवद् बलिनां वरः ।