महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1795, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंभारत! इस प्रकार महाबली भीमसेनने कितने ही बड़े-बड़े गजराजोंको नष्ट करके दूसरे प्राणियोंका भी विनाश आरम्भ किया। उन्होंने युद्धस्थलमें बहुत-से प्रमुख अश्वारोहियोंको मार गिराया। इस प्रकार भीमसेन और कलिंग सैनिकोंका वह युद्ध अत्यन्त घोर रूप धारण करता गया ॥ ५८ १/२ ॥
खलीनान्यथ योक्त्राणि कक्ष्याश्च कनकोज्ज्वलाः ॥ ५९ ॥ परिस्तोमांश्च प्रासांश्च ऋष्ट्यश्च महाधनाः । कवचान्यथ चर्माणि चित्राण्यास्तरणानि च ॥ ६० ॥ तत्र तत्रापविद्धानि व्यदृश्यन्त महाहवे । उस महासमरमें घोड़ोंकी लगाम, जोत, सुवर्णमण्डित चमकीली रस्सियाँ, पीठपर कसी जानेवाली गद्दियाँ (जीन), प्रास, बहुमूल्य ऋष्टियाँ, कवच, ढाल तथा भाँति-भाँतिके विचित्र आस्तरण इधर-उधर बिखरे दिखायी देने लगे ॥ ५९-६० १/२ ॥
प्रासैैर्यन्त्रैर्विचित्रैश्च शस्त्रैश्च विमलैस्तथा ॥ ६१ ॥ स चक्रे वसुधां कीर्णां शबलैः कुसुमैरिव । भीमसेनने बहुत-से प्रासों, विचित्र यन्त्रों और चमकीले शस्त्रोंसे वहाँकी भूमिको पाट दिया, जिससे वह चितकबरे पुष्पोंसे आच्छादित-सी प्रतीत होने लगी ॥ ६१ १/२ ॥
आप्लुत्य रथिनः कांश्चित् परामृश्य महाबलः ॥ ६२ ॥ पातयामास खड्गेन सध्वजानपि पाण्डवः । महाबली पाण्डुनन्दन भीम उछलकर कितने ही रथियोंके पास पहुँच जाते और उन्हें पकड़कर ध्वजोंसहित तलवारसे काट गिराते थे ॥ ६२ १/२ ॥
मुहुरुत्पततो दिक्षु धावतश्च यशस्विनः ॥ ६३ ॥ मार्गांश्च चरतश्चित्रं व्यस्मयन्त रणे जनाः । वे बार-बार उछलते, सम्पूर्ण दिशाओंमें दौड़ते और युद्धके विचित्र पैंतरे दिखाते हुए रणभूमिमें विचरते थे। यशस्वी भीमसेनका यह पराक्रम देखकर लोगोंको बड़ा आश्चर्य होता था ॥ ६३ १/२ ॥
स जघान पदा कांश्चिद् व्याक्षिप्यान्यानपोथयत् ॥ ६४ ॥ खड्गेनान्यांश्च चिच्छेद नादेनान्यांश्च भीषयन् । ऊरुवेगेन चाप्यन्यान् पातयामास भूतले ॥ ६५ ॥ उन्होंने कितने ही योद्धाओंको पैरोंसे कुचलकर मार डाला, कितनोंको ऊपर उछालकर पटक दिया, कितनोंको तलवारसे काट दिया, दूसरे कितने ही योद्धाओंको अपनी भीषण गर्जनासे डरा दिया और कितनों-को अपने महान् वेगसे पृथ्वीपर दे मारा ॥ ६४-६५ ॥
अपरे चैनमालोक्य भयात् पञ्चत्वमागताः । एवं सा बहुला सेना कलिङ्गानां तरस्विनाम् ॥ ६६ ॥ परिवार्य रणे भीष्मं भीमसेनमुपादद्रवत् ।