भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

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पृष्ठ 1826

सोऽहं निवारयिष्यामि सर्वलोकस्य पश्यतः ॥ ४४ ॥
'आज मैं अकेला ही सबके देखते-देखते सेना और बन्धुओंसहित समस्त पाण्डवोंको आगे बढ़नेसे रोक दूँगा' ॥ ४४ ॥
एवमुक्ते तु भीष्मेण पुत्रास्तव जनेश्वर ।
दध्मुः शङ्खान् मुदा युक्ता भेरीः संजघ्निरे भृशम् ॥ ४५ ॥
जनेश्वर! भीष्मके ऐसा कहनेपर आपके पुत्र आनन्दमग्न होकर जोर-जोरसे शंख बजाने और डंका पीटने लगे ॥ ४५ ॥
पाण्डवा हि ततो राजन् श्रुत्वा तं निनदं महत् ।
दध्मुः शङ्खांश्च भेरीश्च मुरजांश्चाप्यनादयन् ॥ ४६ ॥
राजन्! उनका वह महान् शंखनाद सुनकर पाण्डववीर शंख बजाने तथा नगारे और ढोल पीटने लगे ॥

इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि तृतीये युद्धदिवसे
भीष्मदुर्योधनसंवादे अष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः ॥ ५८ ॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें तृतीय युद्धदिवसमें भीष्म और दुर्योधनका संवादविषयक अट्ठावनवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ५८ ॥
[दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/३ श्लोक मिलाकर कुछ ४६ १/३ श्लोक हैं]