महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 185, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंअर्जुनसे बढ़कर दूसरा कोई धनुर्धर नहीं है—इस बातको कर्ण जानता है, दुर्योधन जानता है, आचार्य द्रोण और पितामह भीष्म जानते हैं तथा अन्य जो-जो कौरव वहाँ रहते हैं, वे सब भी जानते हैं ॥ २२ ॥ जानन्त्येतत् कुरवः सर्व एव ये चाप्यन्ये भूमिपालाः समेताः । दुर्योधने राज्यमिहाभवद् यथा अरिंदमे फाल्गुने विद्यमाने ॥ २३ ॥ समस्त कौरव तथा वहाँ एकत्र हुए अन्य भूपाल भी इस बातको जानते हैं कि शत्रुदमन अर्जुनके उपस्थित रहते हुए दुर्योधनने किस उपायसे पाण्डवोंका राज्य प्राप्त किया (अर्थात् उन्होंने अपनी वीरतासे नहीं, अपितु छलपूर्वक जूएके द्वारा ही हमारा राज्य लिया) ॥ २३ ॥ तेनानुबन्धं मन्यते धार्तराष्ट्रः शक्यं हर्तुं पाण्डवानां ममत्वम् । किरीटिना तालमात्रायुधेन तद्वेदिना संयुगं तत्र गत्वा ॥ २४ ॥ राज्य आदिपर जो पाण्डवोंका ममत्व है, उसे हर लेना क्या दुर्योधन सरल समझता है? इसके लिये उसे उन किरीटधारी अर्जुनके साथ युद्धभूमिमें उतरना पड़ेगा, जो चार हाथ लंबा धनुष धारण करते हैं और धनुर्वेदके प्रकाण्ड विद्वान् हैं ॥ २४ ॥ गाण्डीवविस्फारितशब्दमाजा- वशृणवाना धार्तराष्ट्रा ध्रियन्ते । क्रुद्धं न चेदीक्षते भीमसेनं सुयोधनो मन्यते सिद्धमर्थम् ॥ २५ ॥ धृतराष्ट्रके पुत्र तभीतक जीवित हैं, जबतक कि वे युद्धमें गाण्डीव धनुषका टंकारघोष नहीं सुन रहे हैं। दुर्योधन जबतक क्रोधमें भरे हुए भीमसेनको नहीं देख रहा है, तभीतक अपने राज्यप्राप्तिसम्बन्धी मनोरथको सिद्ध हुआ समझे ॥ २५ ॥ इन्द्रोऽप्येतन्नोत्सहेत् तात हर्तु- मैश्वर्यं नो जीवति भीमसेने । धनंजये नकुले चैव सूत तथा वीरे सहदेवे सहिष्णौ ॥ २६ ॥ तात संजय! जबतक भीमसेन, अर्जुन, नकुल तथा सहनशील वीर सहदेव जीवित हैं, तबतक इन्द्र भी हमारे ऐश्वर्यका अपहरण नहीं कर सकता ॥ २६ ॥ स चेदेतां प्रतिपद्येत बुद्धिं वृद्धो राजा सह पुत्रेण सूत ।