महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1997, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंअर्जुनका व्यूहबद्ध कौरव-सेनाकी ओर श्रीकृष्णका ध्यान आकृष्ट करना
भूरिश्रवाने रणभूमिमें प्रयत्नपूर्वक धृष्टकेतुके साथ युद्ध छेड़ दिया। धर्मपुत्र युधिष्ठिरने राजा श्रुतायुपर धावा किया ।। ३१ ½ ।। चेकितानश्च समरे कृपमेवान्वयोधयत् ।। ३२ ।। शेषाः प्रतिययुर्यत्ता भीष्ममेव महारथम् । चेकितानने समरमें कृपाचार्यके ही साथ युद्ध छेड़ दिया। शेष योद्धा प्रयत्नपूर्वक महारथी भीष्मका ही सामना करने लगे ।। ३२ ½ ।। ततो राजसमूहास्ते परिवव्रुर्धनंजयम् ।। ३३ ।। शक्तितोमरनाराचगदापरिघपाणयः । तदनन्तर उन राजसमूहोंने कुन्तीपुत्र धनंजयको सब ओरसे घेर लिया। उन सबके हाथोंमें शक्ति, तोमर, नाराच, गदा और परिघ आदि आयुध शोभा पा रहे थे ।। अर्जुनोऽथ भृशं क्रुद्धो वार्ष्णेयमिदमब्रवीत् ।। ३४ ।। पश्य माधव सैन्यानि धार्तराष्ट्रस्य संयुगे । व्यूढानि व्यूहविदुषा गाङ्गेयेन महात्मना ।। ३५ ।।