भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

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पृष्ठ 2033

इस प्रकार सहसा हाथमें गदा लिये भीमसेनको वेगपूर्वक आते देख जयद्रथने यमदण्डके समान भयंकर पाँच सौ तीखे बाणोंद्वारा सब ओरसे उन्हें घायल कर दिया ॥ ३२ १/२ ॥

अचिन्तयित्वा स शरांस्तरस्वी वृकोदरः क्रोधपरीतचेताः ॥ ३३ ॥ जघान वाहान् समरे समन्तात् पारावतान् सिन्धुराजस्य संख्ये । वेगशाली भीमसेन उसके बाणोंकी कोई परवा न करते हुए मन-ही-मन क्रोधसे जल उठे। तत्पश्चात् उन्होंने समरभूमिमें सिन्धुराजके कबूतरके समान रंगवाले घोड़ोंको मार डाला ॥ ३३ १/२ ॥

ततोऽभिवीक्ष्याप्रतिमप्रभाव- स्तवात्मजस्त्वरमाणो रथेन ॥ ३४ ॥ अभ्याययौ भीमसेनं निहन्तुं समुद्यतास्त्रः सुरराजकल्पः । यह देखकर आपका अनुपम प्रभावशाली पुत्र देवराजसदृश दुर्योधन भीमसेनको मारनेके लिये हथियार उठाये बड़ी उतावलीके साथ रथके द्वारा वहाँ आ पहुँचा ॥ ३४ १/२ ॥

भीमोऽप्यथैनं सहसा विनद्य प्रत्युद्ययौ गदया तर्जयन्: ॥ ३५ ॥ तब भीमसेन भी सहसा सिंहनाद करके गदाद्वारा गर्जन-तर्जन करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़े ॥ ३५ ॥

(जयद्रथो भग्नवाहो रथं तं त्यक्त्वा ययौ यत्र राजा कुरूणाम् । स सौबलः सानुगः सानुजश्च दृष्ट्वा भीमं मूढचेता भयार्तः ॥ घोड़ोंके मारे जानेपर जयद्रथ उस रथको छोड़कर जहाँ शकुनि, सेवकवृन्द तथा छोटे भाइयोंसहित कुरुराज दुर्योधन था, वहीं चला गया। भीमसेनको देखकर जयद्रथका मन किंकर्तव्यविमूढ़ हो गया था। वह भयसे पीड़ित हो रहा था।

भीमोऽप्यथैनं सहसा विनद्य प्रत्युद्ययौ गदया हन्तुकामः । स सौबलं तव पुत्रं निरीक्ष्य दुर्योधनं सानुजं रोषयुक्तः ॥) भीमसेन भी शकुनि और भाइयोंसहित आपके पुत्र दुर्योधनको देखकर रोषमें भर गये और सहसा गर्जना करके गदाद्वारा जयद्रथको मार डालनेकी इच्छासे आगे बढ़े।