भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

पृष्ठ 2077, कुल 2343 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 2077

वे भाँति-भाँतिकी गर्जना करते हुए बिजलीसहित मेघोंके समान शोभा पाते थे। बाण, शक्ति, ऋष्टि, नाराच, भिन्दिपाल, शूल, मुद्गर, फरसों, पर्वतशिखर तथा वृक्षोंका प्रहार करके वे गजारोहियों तथा विशाल गजोंका वध करने लगे ।। १४-१५ १/२ ।। भिन्नकुम्भान् विरुधिरान् भिन्नगात्रांश्च वारणान् ।। १६ ।। अपश्याम महाराज वध्यमानान् निशाचरैः । महाराज! निशाचरोंद्वारा मारे जानेवाले गजराजोंको हमने देखा था। उनके कुम्भस्थल फट गये थे, शरीर रक्तहीन हो गये और उनके भिन्न-भिन्न अंग छिन्न-भिन्न हो गये थे ।। १६ १/२ ।। तेषु प्रक्षीयमाणेषु भग्नेषु गजयोधिषु ।। १७ ।। दुर्योधनो महाराज राक्षसान् समुपाद्रवत् । अमर्षवशमापन्नस्त्यक्त्वा जीवितमात्मनः ।। १८ ।। महाराज! इस प्रकार गजारोहियोंके भग्न एवं नष्ट हो जानेपर दुर्योधनने अमर्षके वशीभूत हो अपने जीवनका मोह छोड़कर उन राक्षसोंपर धावा किया ।। १७-१८ ।। मुमोच निशितान् बाणान् राक्षसेषु परंतप । जघान च महेष्वासः प्रधानांस्तत्र राक्षसान् ।। १९ ।। शत्रुओंको संताप देनेवाले नरेश! महाधनुर्धर दुर्योधनने राक्षसोंपर तीखे बाणोंका प्रहार किया और उनमेंसे प्रधान-प्रधान राक्षसोंको मार डाला ।। १९ ।। संक्रुद्धो भरतश्रेष्ठ पुत्रो दुर्योधनस्तव । वेगवन्तं महारौद्रं विद्युज्जिह्वं प्रमाथिनम् ।। २० ।। शरैश्चतुर्भिंश्चतुरो निजघान महाबलः । भरतश्रेष्ठ! क्रोधमें भरे हुए आपके महाबली पुत्र दुर्योधनने वेगवान्, महारौद्र, विद्युज्जिह्व और प्रमाथी—इन चार राक्षसोंको चार बाणोंसे मार डाला ।। २० १/२ ।। ततः पुनरमेयात्मा शरवर्षं दुरासदम् ।। २१ ।। मुमोच भरतश्रेष्ठो निशाचरबलं प्रति । तत्पश्चात् अमेय आत्मबलसे सम्पन्न भरतश्रेष्ठ दुर्योधनने उस निशाचरसेनाके ऊपर दुर्धर्ष बाणोंकी वर्षा आरम्भ की ।। २१ १/२ ।। तत् तु दृष्ट्वा महत् कर्म पुत्रस्य तव मारिष ।। २२ ।। क्रोधेनाभिप्रजज्वाल भैमसेनिर्महाबलः । आर्य! आपके पुत्रका वह महान् कर्म देखकर भीमसेनका महाबली पुत्र घटोत्कच क्रोधसे जल उठा ।। स विस्फार्य महच्चापमिन्द्राशनिसमप्रभम् ।। २३ ।। अभिदुद्राव वेगेन दुर्योधनमरिंदमम् ।