भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

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पृष्ठ 2163

अश्वत्थामा तथा शल्यः काम्बोजश्च सुदक्षिणः ।
विन्दानुविन्दावावन्त्यौ बाह्निकः सह बाह्निकैः ।। २४ ।।
महता रथवंशेन पार्थस्यावारयन् दिशः ।
तब रथियोंमें श्रेष्ठ कृपाचार्य, दुर्योधन, अश्वत्थामा, शल्य, काम्बोजराज सुदक्षिण, अवन्तीके राजकुमार विन्द और अनुविन्द तथा बाह्लीकदेशीय सैनिकोंके साथ राजा बाह्लीक—इन सबने रथियोंकी विशाल सेना साथ लेकर उसके द्वारा पार्थकी सम्पूर्ण दिशाओंको अर्थात् उनके सभी मार्गोंको रोक दिया ।। २३-२४ १/२ ।।
तथैव भगदत्तश्च श्रुतायुश्च महाबलः ।। २५ ।।
गजानीकेन भीमस्य ताववारयतां दिशः ।
उसी प्रकार भगदत्त तथा महाबली श्रुतायुने हाथियोंकी सेनाद्वारा भीमसेनकी सम्पूर्ण दिशाओंको रोक लिया ।।
भूरिश्रवाः शलश्चैव सौबलश्च विशाम्पते ।। २६ ।।
शरौघैर्विमलैस्तीक्ष्णैर्माद्रीपुत्राववारयन् ।
प्रजानाथ! भूरिश्रवा, शल और शकुनिने तीखे और चमकीले बाण-समूहोंकी वर्षा करके माद्रीकुमार नकुल और सहदेवको रोका ।। २६ १/२ ।।
भीष्मस्तु संहतः संख्ये धार्तराष्ट्रैः ससैनिकैः ।। २७ ।।
युधिष्ठिरं समासाद्य सर्वतः पर्यवारयत् ।
भीष्मने सैनिकोंसहित आपके पुत्रोंके साथ संगठित होकर युद्धमें राजा युधिष्ठिरके पास जाकर उन्हें सब ओरसे घेर लिया ।। २७ १/२ ।।
आपतन्तं गजानीकं दृष्ट्वा पार्थो वृकोदरः ।। २८ ।।
लेलिहन् सृक्किणी वीरो मृगराडिव कानने ।
हाथियोंकी सेनाको आते देख वीर कुन्तीकुमार भीमसेन जैसे वनमें सिंह अपने जबड़ोंको चाटता है, उसी प्रकार मुँहके दोनों कोनोंको चाटने लगे ।। २८ १/२ ।।
भीमस्तु रथिनां श्रेष्ठो गदां गृह्य महाहवे ।। २९ ।।
अवप्लुत्य रथात् तूर्णं तव सैन्यान्यभीषयत् ।
तत्पश्चात् उस महासमरमें रथियोंमें श्रेष्ठ भीमसेन गदा लेकर तुरंत रथसे कूद पड़े और आपकी सेनाओंको भयभीत करने लगे ।। २९ १/२ ।।
तमुद्वीक्ष्य गदाहस्तं ततस्ते गजसादिनः ।। ३० ।।
परिवव्रू रणे यत्ता भीमसेनं समन्ततः ।
गदा हाथमें लिये हुए भीमसेनको देखकर उन गजारोही सैनिकोंने उन्हें यत्नपूर्वक चारों ओरसे घेर लिया ।। ३० १/२ ।।
गजमध्यमनुप्राप्तः पाण्डवः स व्यराजत ।। ३१ ।।
मेघजालस्य महतो यथा मध्यगतो रविः ।

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