भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

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पृष्ठ 2293

दन्तिनां च सहस्राणि हयानामयुतं पुनः ॥ २५ ॥ शिक्षाबलेन निहतं पित्रा तव विशाम्पते । भरतश्रेष्ठ! उस दसवें दिनके आनेपर एकमात्र भीष्मने युद्धमें मत्स्य और पांचालदेशकी सेनाओंके अगणित हाथी, घोड़ोंको मारकर सात महारथियोंका वध कर डाला। प्रजानाथ! फिर पाँच हजार रथियोंका वध करके आपके पितृतुल्य भीष्मने अपने अस्त्र-शिक्षाबलसे उस महायुद्धमें चौदह हजार पैदल सिपाहियों, एक हजार हाथियों और दस हजार घोड़ोंका संहार कर डाला ॥ २३—२५ १/२ ॥

ततः सर्वमहीपानां क्षपयित्वा वरूथिनीम् ॥ २६ ॥ विराटस्य प्रियो भ्राता शतानीको निपातितः । शतानीकं च समरे हत्वा भीष्मः प्रतापवान् ॥ २७ ॥ सहस्राणि महाराज राज्ञां भल्लैरपातयत् । तदनन्तर समस्त भूमिपालोंकी सेनाका उच्छेद करके राजा विराटके प्रिय भाई शतानीकको मार गिराया। महाराज! शतानीकको रणक्षेत्रमें मारकर प्रतापी भीष्मने भल्ल नामक बाणोंद्वारा एक हजार नरेशोंको धराशायी कर दिया ॥ २६-२७ १/२ ॥

उद्विग्नाः समरे योधा विक्रोशन्ति धनंजयम् ॥ २८ ॥ ये च केचन पार्थानामभियाता धनंजयम् । राजानो भीष्ममासाद्य गतास्ते यमसादनम् ॥ २९ ॥ उस रणक्षेत्रमें समस्त योद्धा भीष्मके भयसे उद्विग्न हो अर्जुनको पुकारने लगे। पाण्डवपक्षके जो कोई नरेश अर्जुनके साथ गये थे, वे भीष्मके सामने पहुँचते ही यमलोकके पथिक हो गये ॥ २८-२९ ॥

एवं दश दिशो भीष्मः शरजालैः समन्ततः । अतीत्य सेनां पार्थानामवतस्थे चमूमुखे ॥ ३० ॥ इस प्रकार भीष्मने दसों दिशाओंमें सब ओर अपने बाणोंका जाल-सा बिछा दिया और कुन्तीकुमारोंकी सेनाको परास्त करके वे सेनाके प्रमुख भागमें स्थित हो गये ॥ ३० ॥

स कृत्वा सुमहत् कर्म तस्मिन् वै दशमेऽहनि । सेनयोरन्तरे तिष्ठन् प्रगृहीतशरासनः ॥ ३१ ॥ दसवें दिन यह महान् पराक्रम करके हाथमें धनुष लिये वे दोनों सेनाओंके बीचमें खड़े हो गये ॥ ३१ ॥

न चैनं पार्थिवाः केचिच्छक्ता राजन् निरीक्षितुम् । मध्यं प्राप्तं यथा ग्रीष्मे तपन्तं भास्करं दिवि ॥ ३२ ॥ राजन्! जैसे ग्रीष्म-ऋतुमें आकाशके मध्यभागमें पहुँचे हुए दोपहरके तपते हुए सूर्यकी ओर देखना कठिन होता है, उसी प्रकार उस समय कोई राजा भीष्मकी ओर आँख उठाकर देखनेका भी साहस न कर सके ॥ ३२ ॥