भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

पृष्ठ 2298, कुल 2343 में से

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पृष्ठ 2298

पहियोंकी घरघराहट उस आगकी आँच थी। बड़े-बड़े अस्त्रोंका प्राकट्य अंगारके समान था। विचित्र चाप ही उस आगकी प्रचण्ड ज्वालाओंके समान था। बड़े-बड़े वीर ही ईंधनके समान उसमें गिरकर भस्म हो रहे थे ॥ विवृत्य रथसङ्घानामन्तरेण विनिःसृतः ॥ ७ ॥ दृश्यते स्म नरेन्द्रणां पुनर्मध्यगतश्चरन् । पितामह भीष्म एक ही क्षणमें रथकी पंक्ति तोड़कर घेरेसे बाहर निकल आते और पुनः राजाओंकी सेनाके मध्यभागमें प्रवेश करके वहाँ विचरते दिखायी देते थे ॥ ततः पञ्चालराजं च धृष्टकेतुमचिन्त्य च ॥ ८ ॥ पाण्डवानीकिनीमध्यमाससाद विशाम्पते । प्रजानाथ! तत्पश्चात् पांचालराज द्रुपद तथा धृष्टकेतुकी कुछ भी परवा न करके वे पाण्डव-सेनाके भीतर घुस आये ॥ ८ ½ ॥ ततः सात्यकिभीमौ च पाण्डवं च धनंजयम् ॥ ९ ॥ द्रुपदं च विराटं च धृष्टद्युम्नं च पार्षतम् । भीमघोषैर्महावेगैर्मर्मावरणभेदिभिः ॥ १० ॥ षडेतान् निशितैर्भीष्मः प्रविव्याधोत्तमैः शरैः । फिर भयंकर शब्द करनेवाले, महान् वेगशाली, मर्मस्थानों और कवचोंको भी विदीर्ण कर देनेवाले, तीखे एवं उत्तम बाणोंद्वारा उन्होंने सात्यकि, भीमसेन, पाण्डुपुत्र अर्जुन, विराट, द्रुपद तथा उनके पुत्र धृष्टद्युम्न—इन छः महारथियोंको अत्यन्त घायल कर दिया ॥ ९-१० ½ ॥ तस्य ते निशितान् बाणान् संनिवार्य महारथाः ॥ ११ ॥ दशभिर्दशभिर्भीष्ममर्दयामासुरोजसा । तब उन महारथी वीरोंने भीष्मके उन तीखे बाणोंका निवारण करके पुनः दस-दस बाणोंद्वारा भीष्मको बलपूर्वक पीड़ित किया ॥ ११ ½ ॥ शिखण्डी तु महाबाणान् यान् मुमोच महारथः ॥ १२ ॥ न चक्रुस्ते रुजं तस्य स्वर्णपुङ्खाः शिलाशिताः । महारथी शिखण्डीने जिन महान् बाणोंका प्रयोग किया था, वे सब सुवर्णमय पंखसे युक्त और शिलापर रगड़कर तेज किये गये थे, तो भी भीष्मजीके शरीरमें घाव या पीड़ा नहीं उत्पन्न कर सके ॥ १२ ½ ॥ ततः किरीटी संरब्धो भीष्ममेवाभ्यधावत ॥ १३ ॥ शिखण्डिनं पुरस्कृत्य धनुश्चास्य समाच्छिनत् । तब किरीटधारी अर्जुनने कुपित हो शिखण्डीको आगे किये हुए ही भीष्मपर धावा किया और उनके धनुषको काट डाला ॥ १३ ½ ॥ भीष्मस्य धनुषश्छेदं नामृष्यन्त महारथाः ॥ १४ ॥