महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें**भगवान् श्रीकृष्णने कहा—**राजन्! मैंने हस्तिनापुर जाकर कौरवसभामें धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधनसे यथार्थ लाभदायक और हितकर बात कही थी; परंतु वह दुर्बुद्धि उसे स्वीकार ही नहीं करता था॥ ६॥
युधिष्ठिर उवाच
तस्मिन्नुत्पथमापन्ने कुरुवृद्धः पितामहः।
किमुक्तवान् हृषीकेश दुर्योधनममर्षणम्॥ ७॥
**युधिष्ठिरने पूछा—**हृषीकेश! दुर्योधनके कुमार्गका आश्रय लेनेपर कुरुकुलके वृद्ध पुरुष पितामह भीष्मने ईर्ष्या और अमर्षमें भरे हुए दुर्योधनसे क्या कहा?॥ ७॥
आचार्यो वा महाभाग भारद्वाजः किमब्रवीत्।
पिता वा धृतराष्ट्रस्तं गान्धारी वा किमब्रवीत्॥ ८॥
महाभाग! भरद्वाजनन्दन आचार्य द्रोणने उस समय क्या कहा? पिता धृतराष्ट्र और माता गान्धारीने भी दुर्योधनसे उस समय क्या बात कही?॥ ८॥
पिता यवीयानस्माकं क्षत्ता धर्मविदां वरः।
पुत्रशोकाभिसंतप्तः किमाह धृतराष्ट्रजम्॥ ९॥