महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1069, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंउसमें बहुत-से अस्त्र-शस्त्र आदि युद्धोपयोगी आवश्यक सामान एवं द्रव्य यथास्थान रखे गये थे। उस रथके चलनेपर मेघोंकी गर्जनाके समान गम्भीर शब्द होता था। दारुकका छोटा भाई उस रथको सात्यकिके पास ले आया॥ ८५॥
तं समारुह्य शैनेयस्तव सैन्यमुपाद्रवत्।
दारुकोऽपि यथाकामं प्रययौ केशवान्तिकम्॥ ८६॥
सात्यकिने उसीपर आरूढ़ होकर आपकी सेनापर आक्रमण किया। दारुक भी इच्छानुसार भगवान् श्रीकृष्णके निकट चला गया॥ ८६॥
कर्णस्यापि रथं राजन् शंखगोक्षीरपाण्डुरैः।
चित्रकाञ्चनसंनाहैः सदश्वैर्वेगवत्तरैः॥ ८७॥
राजन्! कर्णके लिये भी एक सुन्दर रथ लाया गया, जिसमें शंख और गोदुग्धके समान श्वेतवर्णवाले, विचित्र सुवर्णमय कवचसे सुसज्जित और अत्यन्त वेगशाली श्रेष्ठ अश्व जुते हुए थे॥ ८७॥
हेमकक्ष्याध्वजोपेतं कॢप्तयन्त्रपताकिनम्।
अग्र्यं रथं सुयन्तारं बहुशस्त्रपरिच्छदम्॥ ८८॥
उसमें सुवर्णमयी रज्जुसे आवेष्टित ध्वजा फहरा रही थी। वह रथ यन्त्र और पताकाओंसे सुशोभित था। उसके भीतर बहुत-से अस्त्र-शस्त्र आदि आवश्यक सामान रखे गये थे। उस श्रेष्ठ रथका सारथि भी सुयोग्य था॥ ८८॥
उपाजहुस्तमास्थाय कर्णोऽप्यभ्यद्रवद् रिपून्।
एतत् ते सर्वमाख्यातं यन्मां त्वं परिपृच्छसि॥ ८९॥
दुर्योधनके सेवक वह रथ लेकर आये और कर्णने उसके ऊपर आरूढ़ होकर शत्रुओंपर धावा किया। राजन्! आप मुझसे जो कुछ पूछ रहे थे, वह सब मैंने आपको बता दिया॥ ८९॥
भूयश्चापि निबोधेमं तवापनयजं क्षयम्।
एकत्रिंशत् तव सुता भीमसेनेन पातिताः॥ ९०॥
दुर्मुखं प्रमुखे कृत्वा सततं चित्रयोधिनम्।
अब पुनः आपके ही अन्यायसे होनेवाले इस महान् जनसंहारका वृत्तान्त सुनिये। भीमसेनने अबतक सदा विचित्र युद्ध करनेवाले दुर्मुख आदि आपके इकतीस पुत्रोंको मार गिराया है॥ ९० १/२॥
शतशो निहताः शूराः सात्वतेनार्जुनेन च॥ ९१॥
भीष्मं प्रमुखतः कृत्वा भगदत्तं च भारत।
एवमेष क्षयो वृत्तो राजन् दुर्मन्त्रिते तव॥ ९२॥
भारत! इसी प्रकार सात्यकि और अर्जुनने भी भीष्म और भगदत्त आदि सैकड़ों शूरवीरोंका संहार कर डाला है। राजन्! इस प्रकार आपकी कुमन्त्रणाके फलस्वरूप यह