महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1112, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंयथा मध्यंदिने सूर्य प्रतपन्तं गभस्तिभिः । तथा तव सुतं मध्ये प्रतपन्तं शरार्चिभिः ॥ १५ ॥ न शेकुर्भ्रातरं युद्धे पाण्डवाः समुदीक्षितुम् । जैसे अपनी किरणोंसे तपते हुए दोपहरके सूर्यकी ओर कोई देख नहीं पाता, उसी प्रकार अपने बाणोंकी ज्वालाओंसे शत्रुओंको संताप देते हुए सेनाके मध्यभागमें खड़े आपके पुत्र एवं अपने भाई दुर्योधनकी ओर उस युद्धस्थलमें पाण्डव देख नहीं पाते थे ॥ १५ १/२ ॥ पलायनकृतोत्साहा निरुत्साहा द्विषज्जये ॥ १६ ॥ पर्यधावन्त पञ्चाला वध्यमाना महात्मना । महामनस्वी दुर्योधनकी मार खाकर पांचाल सैनिक इधर-उधर भागने लगे। अब वे पलायन करनेमें उत्साह दिखा रहे थे। उनमें शत्रुओंको जीतनेका उत्साह नहीं रह गया था ॥ १६ १/२ ॥ रुक्मपुङ्खैः प्रसन्नाग्रैस्तव पुत्रेण धन्विना ॥ १७ ॥ अर्द्यमानाः शरैस्तूर्णं न्यपतन् पाण्डुसैनिकाः । आपके धनुर्धर पुत्रके द्वारा चलाये हुए सुवर्णमय पंख तथा चमकती हुई धारवाले बाणोंसे पीड़ित होकर बहुतेरे पाण्डव-सैनिक तुरंत धराशायी हो गये ॥ १७ १/२ ॥ न तादृशं रणे कर्म कृतवन्तस्तु तावकाः ॥ १८ ॥ यादृशं कृतवान् राजा पुत्रस्तव विशाम्पते । प्रजानाथ! आपके सैनिकोंने रणभूमिमें वैसा पराक्रम नहीं किया था, जैसा कि आपके पुत्र राजा दुर्योधनने किया ॥ पुत्रेण तव सा सेना पाण्डवी मथिता रणे ॥ १९ ॥ नलिनी द्विरदेनेव समन्तात् फुल्लपङ्कजा । जैसे हाथी सब ओरसे खिले हुए कमलपुष्पोंसे सुशोभित पोखरेको मथ डालता है, उसी प्रकार आपके पुत्रने रणभूमिमें पाण्डव-सेनाको मथ डाला ॥ १९ १/२ ॥ क्षीणतोयानिलार्काभ्यां हतत्विडिव पद्मिनी ॥ २० ॥ बभूव पाण्डवी सेना तव पुत्रस्य तेजसा । जैसे हवा और सूर्यसे पानी सूख जानेके कारण पद्मिनी हतप्रभ हो जाती है, उसी प्रकार आपके पुत्रके तेजसे तप्त होकर पाण्डव-सेना श्रीहीन हो गयी थी ॥ २० १/२ ॥ पाण्डुसेनां हतां दृष्ट्वा तव पुत्रेण भारत ॥ २१ ॥ भीमसेनपुरोगास्तु पञ्चालाः समुपाद्रवन् । भारत! आपके पुत्रद्वारा पाण्डव-सेनाको मारी गयी देख पांचालोंने भीमसेनको अगुआ बनाकर उसपर आक्रमण किया ॥ २१ १/२ ॥