महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1157, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंइस प्रकार शक्तिसे आहत होकर भीमसेन काँप उठे और मूर्च्छित हो गये। फिर सचेत होनेपर बलवान् भीमने उनपर गदाका प्रहार किया ।। १४ १/२ ।। सा पाण्डवेन प्रहिता बाह्लीकस्य शिरोऽहरत् ।। १५ ।। स पपात हतः पृथ्व्यां वज्राहत इवाद्रिराट् । पाण्डुपुत्र भीमसेनद्वारा चलायी हुई उस गदाने बाह्लीकका सिर उड़ा दिया। वे वज्रके मारे हुए पर्वतराजकी भाँति मरकर पृथ्वीपर गिर पड़े ।। १५ १/२ ।। तस्मिन् विनिहते वीरे बाह्लीके पुरुषर्षभ ।। १६ ।। पुत्रास्तेऽभ्यर्दयन् भीमं दश दाशरथेः समाः । नरश्रेष्ठ! वीर बाह्लीकके मारे जानेपर श्रीरामचन्द्रजीके समान पराक्रमी आपके दस पुत्र भीमसेनको पीड़ा देने लगे ।। १६ १/२ ।। नागदत्तो दृढरथो महाबाहुरयोभुजः ।। १७ ।। दृढः सुहस्तो विरजाः प्रमाथ्युग्रोऽनुयाय्यपि । उनके नाम इस प्रकार हैं—नागदत्त, दृढरथ (दृढरथाश्रय), महाबाहु, अयोभुज (अयोबाहु), दृढ (दृढक्षत्र), सुहस्त, विरजा, प्रमाथी, उग्र (उग्रश्रवा) और अनुयायी (अग्रयायी) ।। १७ १/२ ।। तान् दृष्ट्वा चुक्रुधे भीमो जगृहे भारसाधनान् ।। १८ ।। एकमेकं समुद्दिश्य पातयामास मर्मसु । उनको सामने देखकर भीमसेन कुपित हो उठे। उन्होंने प्रत्येकके लिये एक-एक करके भारसाधनमें समर्थ दस बाण हाथमें लिये और उन्हें उनके मर्मस्थानोंपर चलाया ।। १८ १/२ ।। ते विद्धा व्यसवः पेतुः स्यन्दनेभ्यो हतौजसः ।। १९ ।। चण्डवातप्रभग्नास्तु पर्वताग्रान्महीरुहाः । उन बाणोंसे घायल होकर आपके पुत्र अपने प्राणोंसे हाथ धो बैठे और पर्वतशिखरसे प्रचण्ड वायुद्वारा उखाड़े हुए वृक्षोंके समान तेजोहीन होकर रथोंसे नीचे गिर पड़े ।। १९ १/२ ।। नाराचैर्दशभिर्भीमस्तान् निहत्य तवात्मजान् ।। २० ।। कर्णस्य दयितं पुत्रं वृषसेनमावाकिरत् । आपके उन पुत्रोंको दस नाराचोंद्वारा मारकर भीमसेनने कर्णके प्यारे पुत्र वृषसेनपर बाणोंकी वर्षा आरम्भ कर दी ।। २० १/२ ।। ततो वृकरथो नाम भ्राता कर्णस्य विश्रुतः ।। २१ ।। जघान भीमं नाराचैस्तमप्यभ्यद्रवद् बली । तदनन्तर कर्णके सुविख्यात बलवान् भ्राता वृकरथने आकर भीमसेनपर भी आक्रमण किया और उन्हें नाराचोंद्वारा घायल कर दिया ।। २१ १/२ ।।