भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

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पृष्ठ 1182

न हि मद्वीर्यमासाद्य फाल्गुनः प्रसहिष्यति । यथा वेलां समासाद्य सागरो मकरालयः ॥ ७४ ॥ 'जैसे समुद्र तटभूमितक पहुँचकर शान्त हो जाता है, उसी प्रकार अर्जुन मेरे समीप आकर मेरा पराक्रम नहीं सह सकेंगे' ॥ ७४ ॥

इत्युक्त्वा प्रययौ राजा सैन्येन महता वृतः । फाल्गुनं प्रति दुर्धर्षः क्रोधात् संरक्तलोचनः ॥ ७५ ॥ ऐसा कहकर दुर्धर्ष राजा दुर्योधनने क्रोधसे लाल आँखें करके विशाल सेनाके साथ अर्जुनपर आक्रमण किया ॥

तं प्रयान्तं महाबाहुं दृष्ट्वा शारद्वतस्तदा । अश्वत्थामानमासाद्य वाक्यमेतदुवाच ह ॥ ७६ ॥ महाबाहु दुर्योधनको अर्जुनके सामने जाते देख शरद्वान्के पुत्र कृपाचार्यने उस समय अश्वत्थामाके पास जाकर यह बात कही— ॥ ७६ ॥

एष राजा महाबाहुरमर्षी क्रोधमूर्च्छितः । पतङ्गवृत्तिमास्थाय फाल्गुनं योद्धुमिच्छति ॥ ७७ ॥ 'यह अमर्षशील महाबाहु राजा दुर्योधन क्रोधसे अपनी सुधबुध खो बैठा है और पतंगोंकी वृत्तिका आश्रय ले अर्जुनके साथ युद्ध करना चाहता है ॥ ७७ ॥

यावन्नः पश्यमानानां प्राणान् पार्थेन संगतः । न जह्यात् पुरुषव्याघ्रस्तावद् वारय कौरवम् ॥ ७८ ॥ 'यह पुरुषसिंह नरेश अर्जुनसे भिड़कर हमारे देखते-देखते जबतक अपने प्राणोंको त्याग न दे, उसके पहले ही तुम जाकर उस कुरुवंशी राजाको रोको ॥ ७८ ॥

यावत् फाल्गुनबाणानां गोचरं नाद्य गच्छति । कौरवः पार्थिवो वीरस्तावद् वारय संयुगे ॥ ७९ ॥ 'यह कौरववंशका वीर भूपाल आज जबतक अर्जुनके बाणोंकी पहुँचके भीतर नहीं जाता है, तभीतक इसे रोक दो ॥ ७९ ॥

यावत् पार्थशरैर्घोरैर्निर्मुक्तोरगसंनिभैः । न भस्मीक्रियते राजा तावद् युद्धान्निवार्यताम् ॥ ८० ॥ 'केंचुलसे छूटे हुए सर्पोंके समान अर्जुनके भयंकर बाणोंद्वारा जबतक राजा दुर्योधन भस्म नहीं कर दिया जाता है, तबतक ही उसे युद्धसे रोक दो ॥ ८० ॥

अयुक्तमिव पश्यामि तिष्ठत्स्वस्मासु मानद । स्वयं युद्धाय यद् राजा पार्थं यात्यसहायवान् ॥ ८१ ॥ 'मानद! यह मुझे अनुचित-सा दिखायी देता है कि हमलोगोंके रहते हुए स्वयं राजा दुर्योधन बिना किसी सहायकके अर्जुनके साथ युद्धके लिये जाय ॥ ८१ ॥

दुर्लभं जीवितं मन्ये कौरव्यस्य किरीटिना ।