महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1270, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंतब सम्पूर्ण जगत्का स्वामी शक्तिशाली वीर दुर्योधन धनुष और रथसे हीन होकर तुरंत ही कृतवर्माके तेजस्वी रथपर आरूढ़ हो गया ॥ २३ ॥
दुर्योधने परावृत्ते शैनेयस्तव वाहिनीम् ।
द्रावयामास विशिखैर्निशामध्ये विशाम्पते ॥ २४ ॥
प्रजानाथ! उस आधीरातके समय दुर्योधनके पराङ्मुख हो जानेपर सात्यकिने आपकी सेनाको अपने बाणोंद्वारा खदेड़ना आरम्भ किया ॥ २४ ॥
शकुनिश्चार्जुनं राजन् परिवार्य समन्ततः ।
रथैरनेकसाहस्रैर्गजैश्चापि सहस्रशः ॥ २५ ॥
तथा हयसहस्रैश्च नानाशास्त्रैर्वाकिरत् ।
राजन्! उधर शकुनिने कई हजार रथों, सहस्रों हाथियों और सहस्रों घोड़ोंद्वारा अर्जुनको चारों ओरसे घेरकर उनपर नाना प्रकारके शस्त्रोंकी वर्षा प्रारम्भ कर दी ॥ २५ १/२ ॥
ते महास्त्राणि सर्वाणि विकिरन्तोऽर्जुनं प्रति ॥ २६ ॥
अर्जुनं योधयन्ति स्म क्षत्रियाः कालचोदिताः ।
वे कालप्रेरित क्षत्रिय अर्जुनपर बड़े-बड़े अस्त्रोंकी वर्षा करते हुए उनके साथ युद्ध करने लगे ॥ २६ १/२ ॥
तान्यर्जुनः सहस्राणि रथवारणवाजिनाम् ॥ २७ ॥
प्रत्यवारयदायस्तः प्रकुर्वन् विपुलं क्षयम् ।
यद्यपि अर्जुन कौरव-सेनाका महान् संहार करते-करते थक गये थे, तो भी उन्होंने उन सहस्रों रथों, हाथियों और घुड़सवारोंकी सेनाको आगे बढ़नेसे रोक दिया ॥ २७ १/२ ॥
ततस्तु समरे शूरः शकुनिः सीबलस्तदा ॥ २८ ॥
विव्याध निशितैर्बाणैरर्जुनं प्रहसन्निव ।
पुनश्चैव शतेनास्य संरुरोध महारथम् ॥ २९ ॥
उस समय समरभूमिमें सुबलकुमार शूरवीर शकुनिने हँसते हुए-से तीखे बाणोंद्वारा अर्जुनको बींध डाला। फिर सौ बाण मारकर उनके विशाल रथको अवरुद्ध कर दिया ॥
तमर्जुनस्तु विंशत्या विव्याध युधि भारत ।
अथेतरान् महेष्वासांस्त्रिभिस्त्रिभिरविध्यत ॥ ३० ॥
भारत! उस युद्धके मैदानमें अर्जुनने शकुनिको बीस बाण मारे और अन्य महाधनुर्धरोंको तीन-तीन बाणोंसे घायल कर दिया ॥ ३० ॥
निवार्य तान् बाणगणैर्युधि राजन् धनंजयः ।
जघान तावकान् योधान् वज्रपाणिरिवासुरान् ॥ ३१ ॥
राजन्! युद्धस्थलमें अर्जुनने अपने बाण-समूहोंद्वारा आपके उन योद्धाओंको रोककर जैसे वज्रपाणि इन्द्र असुरोंका संहार करते हैं, उसी प्रकार उन सबका वध कर