भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 1398

कुछ योद्धा लड़नेका उत्साह खो बैठे, कुछ मनस्वी वीर रोषमें भर गये, कितने ही योद्धा उनका पराक्रम देख आश्चर्यचकित हो उठे और कितने ही अमर्षके वशीभूत हो गये ॥ २७ १/२ ॥

हस्तैर्हस्ताग्रमपरे प्रत्यपिंषन् नराधिपाः ॥ २८ ॥
अपरे दशनैरोष्ठानदशन् क्रोधमूर्च्छिताः ।
कोई-कोई नरेश हाथसे हाथ मलने लगे। कुछ क्रोधसे आतुर हो दाँतोंसे ओठ चबाने लगे ॥ २८ १/२ ॥

व्याक्षिपन्नायुधान्यन्ये ममृदुश्चापरे भुजान् ॥ २९ ॥
अन्ये चान्वपतन् द्रोणं त्यक्तात्मानो महौजसः ।
कुछ लोग अपने आयुधोंको उछालने और धनुषकी प्रत्यंचा खींचने लगे। दूसरे योद्धा अपनी भुजाओंको मसलने लगे तथा अन्य बहुत-से महातेजस्वी वीर अपने प्राणोंका मोह छोड़कर द्रोणाचार्यपर टूट पड़े ॥ २९ १/२ ॥

पञ्चालास्तु विशेषेण द्रोणसायकपीड़िताः ॥ ३० ॥
समसज्जन्त राजेन्द्र समरे भृशवेदनाः ।
राजेन्द्र! पांचाल सैनिक द्रोणाचार्यके बाणोंद्वारा विशेषरूपसे पीड़ित हो अधिक वेदना सहते हुए भी समरभूमिमें डटे रहे ॥ ३० १/२ ॥

ततो विराटद्रुपदौ द्रोणं प्रययतू रणे ॥ ३१ ॥
तथा चरन्तं संग्रामे भृशं समरदुर्जयम् ।
इस प्रकार संग्राममें विचरते हुए रणदुर्जय द्रोणाचार्यपर राजा विराट और द्रुपदने एक साथ चढ़ाई की ॥ ३१ १/२ ॥

द्रुपदस्य ततः पौत्रास्त्रय एव विशाम्पते ॥ ३२ ॥
चेदयश्च महेष्वासा द्रोणमेवाभ्ययुर्युधि ।
प्रजानाथ! तदनन्तर राजा द्रुपदके तीनों ही पौत्रों तथा चेदिदेशीय महाधनुर्धर योद्धाओंने भी युद्धस्थलमें द्रोणाचार्यपर ही आक्रमण किया ॥ ३२ १/२ ॥

तेषां द्रुपदपौत्राणां त्रयाणां निशितैः शरैः ॥ ३३ ॥
त्रिभिर्द्रोणोऽहरत् प्राणांस्ते हता न्यपतन् भुवि ।
तब द्रोणाचार्यने तीन तीखे बाणोंका प्रहार करके द्रुपदके तीनों पौत्रोंके प्राण हर लिये। वे तीनों मरकर पृथ्वीपर गिर पड़े ॥ ३३ १/२ ॥

ततो द्रोणोऽजयद् युद्धे चेदिकैकेयसृञ्जयान् ॥ ३४ ॥
मत्स्यांश्चैवाजयत् कृत्स्नान् भारद्वाजो महारथान् ।
तत्पश्चात् भरद्वाजनन्दन द्रोणाचार्यने युद्धमें चेदि, केकय, सृंजय तथा मत्स्य देशके सम्पूर्ण महारथियोंको परास्त कर दिया ॥ ३४ १/२ ॥