महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ
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देहधारी द्रोणके शरीरसे प्राण निकल गये थे, अतः वे कुछ भी बोल नहीं रहे थे। इस अवस्थामें उनके मस्तकका बाल पकड़कर धृष्टद्युम्नने तलवारसे उनके सिरको धड़से काट लिया ।। ६२ १/२ ।। हर्षेण महता युक्तो भारद्वाजे निपातिते ।। ६३ ।। सिंहनादरवं चक्रे भ्रामयन् खड्गमाहवे । इस प्रकार द्रोणाचार्यको मार गिरानेपर धृष्टद्युम्नको महान् हर्ष हुआ और वे रणभूमिमें तलवार घुमाते हुए जोर-जोरसे सिंहनाद करने लगे ।। ६३ १/२ ।।