भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 1507

निवार्य परमेष्वासौ कोपसंरक्तलोचनौ । युयुत्सुनपरान् संख्ये प्रतीयुः क्षत्रियर्षभाः ॥ ६८ ॥ क्रोधसे लाल आँखें किये उन दोनों महान् धनुर्धरोंको रोककर वे क्षत्रियशिरोमणि वीर समरभूमिमें युद्धकी इच्छासे आते हुए शत्रुओंका सामना करनेके लिये चल दिये ॥ ६८ ॥

इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि नारायणास्त्रमोक्षपर्वणि धृष्टद्युम्नसात्यकि- क्रोधेऽष्टनवत्यधिकशततमोऽध्यायः ॥ १९८ ॥ इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत नारायणास्त्रमोक्षपर्वमें धृष्टद्युम्न और सात्यकिका क्रोधविषयक एक सौ अठानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ १९८ ॥