भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 1538, कुल 3237 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1538

धृष्टद्युम्नरथं त्यक्त्वा भीताः सम्प्राद्रवन् दिशः।
तब पाण्डुपुत्र भीमसेन और समस्त पांचाल भयभीत हो धृष्टद्युम्नका रथ छोड़कर चारों दिशाओंमें भाग गये ।। १२९ १/२ ।।
तान् प्रभग्नांस्ततो द्रोणिः पृष्ठतो विकिरन् शरान् ।। १३० ।।
अभ्यवर्तत वेगेन कालयन् पाण्डुवाहिनीम्।
उन भागते हुए सैनिकोंपर पीछेसे बाण बिखेरते और पाण्डव-सेनाको खदेड़ते हुए अश्वत्थामाने बड़े वेगसे पीछा किया ।। १३० १/२ ।।
ते वध्यमानाः समरे द्रोणपुत्रेण पार्थिवाः ।। १३१ ।।
द्रोणपुत्रभयाद् राजन् दिशः सर्वाश्च भेजिरे ।। १३२ ।।
राजन्! समरांगणमें द्रोणपुत्रके द्वारा मारे जाते हुए समस्त राजाओंने उसके भयसे भागकर सम्पूर्ण दिशाओंकी शरण ली ।। १३१-१३२ ।।

इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि नारायणास्त्रमोक्षपर्वण्यश्वत्थामपराक्रमे
द्विशततमोऽध्यायः ।। २०० ।।
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत नारायणास्त्रमोक्षपर्वमें अश्वत्थामाका पराक्रमविषयक दो सौवाँ अध्याय पूरा हुआ ।। २०० ।।