महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ
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क्षत्रियाणामभीरूणां युक्तमत्र महद् यशः ॥ १ ॥ य इदं पठते पर्व शृणुयाद् वापि नित्यशः । स मुच्यते महापापैः कृतैर्घोरैश्च कर्मभिः ॥ २ ॥ यज्ञावाप्तिर्ब्राह्मणस्येह नित्यं घोरे युद्धे क्षत्रियाणां यशश्च । शेषौ वर्णौ काममिष्टं लभेते पुत्रान् पौत्रान् नित्यमिष्टांस्तथैव ॥ ३ ॥