महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंस्वयं वैरं महत् कृत्वा वार्यमाणः सुहृद्गणैः ।। ७६ ।। प्रधने हतभूयिष्ठैः किंस्विद् दुर्योधनोऽब्रवीत् । हितैषी सुहृदोंके मना करनेपर भी पाण्डवोंके साथ स्वयं बड़ा भारी वैर ठानकर दुर्योधनने, जब संग्राममें उसके अधिकांश सैनिक मार डाले गये, तब क्या कहा? ।। भ्रातरं निहतं दृष्ट्वा भीमसेनेन संयुगे ।। ७७ ।। रुधिरे पीयमाने च किंस्विद् दुर्योधनोऽब्रवीत् । युद्धस्थलमें अपने भाई दुःशासनको भीमसेनके द्वारा मारा गया देख जब कि उसका रक्त पीया जा रहा था, दुर्योधनने क्या कहा? ।। ७७ १/२ ।। सह गान्धारराजेन सभायां यदभाषत ।। ७८ ।। कर्णोऽर्जुनं रणे हन्ता हते तस्मिन् किमब्रवीत् । गान्धारराज शकुनिके साथ सभामें दुर्योधनने जो यह कहा था कि 'कर्ण अर्जुनको मार डालेगा', उसके विपरीत जब कर्ण स्वयं मारा गया तब उसने क्या कहा? ।। ७८ १/२ ।। द्यूतं कृत्वा पुरा हृष्टो वञ्चयित्वा च पाण्डवान् ।। ७९ ।। शकुनिः सीबलस्तात हते कर्णे किमब्रवीत् । तात! पहले द्यूतक्रीड़ाका आयोजन करके पाण्डवोंको ठग लेनेके बाद जिसे बड़ा हर्ष हुआ था, वह सुबल-पुत्र शकुनि कर्णके मारे जानेपर क्या बोला? ।। ७९ १/२ ।। कृतवर्मा महेष्वासः सात्वतानां महारथः ।। ८० ।। हतं वैकर्तनं दृष्ट्वा हार्दिक्यः किमभाषत । वैकर्तन कर्णको मारा गया देख सात्वतवंशके महाधनुर्धर महारथी हृदिकपुत्र कृतवर्माने क्या कहा? ।। ब्राह्मणाः क्षत्रिया वैश्या यस्य शिक्षामुपासते ।। ८१ ।। धनुर्वेदं चिकीर्षन्तो द्रोणपुत्रस्य धीमतः । युवा रूपेण सम्पन्नो दर्शनीयो महायशाः ।। ८२ ।। अश्वत्थामा हते कर्णे किमभाषत संजय । संजय! धनुर्वेद प्राप्त करनेकी इच्छावाले ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य जिस बुद्धिमान् द्रोणपुत्रके पास आकर शिक्षा ग्रहण करते हैं, जो सुन्दर रूपसे सम्पन्न, युवक, दर्शनीय तथा महायशस्वी है, उस अश्वत्थामाने कर्णके मारे जानेपर क्या कहा? ।। ८१-८२ १/२ ।। आचार्यो यो धनुर्वेदे गौतमो रथसत्तमः ।। ८३ ।। कृपः शारद्वतस्तात हते कर्णे किमब्रवीत् । तात! धनुर्वेदके आचार्य एवं रथियोंमें श्रेष्ठ, गौतमवंशी, शरद्वान्के पुत्र कृपाचार्यने कर्णके मारे जानेपर क्या कहा? ।। ८३ १/२ ।। मद्रराजो महेष्वासः शल्यः समितिशोभनः ।। ८४ ।।