महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1655, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंहों ॥ ६ ॥
द्विरदस्यन्दनाश्वेभ्यः पेतुर्वीरा द्विषद्धताः । विमानेभ्यो यथा क्षीणे पुण्ये स्वर्गसदस्तथा ॥ ७ ॥ शत्रुओंद्वारा मारे गये वीर हाथी, रथ और घोड़ोंसे उसी प्रकार गिर रहे थे, जैसे स्वर्गवासी जीव पुण्य क्षीण होनेपर वहाँके विमानोंसे नीचे गिर पड़ते हैं ॥ ७ ॥
गदाभिरन्ये गुर्वीभिः परिघैर्मुसलैरपि । पोथिताः शतशः पेतुर्वीरा वीरतरै रणे ॥ ८ ॥ अन्य सैकड़ों वीर बड़े-बड़े वीरोंद्वारा भारी गदाओं, परिघों और मुसलोंसे कुचले जाकर रणभूमिमें गिर रहे थे ॥ ८ ॥
रथा रथैर्विमथिता मत्ता मत्तैर्द्विपा द्विपैः । सादिनः सादिभिश्चैव तस्मिन् परमसंकुले ॥ ९ ॥ उस भारी घमासान युद्धमें रथोंने रथोंको मथ डाला, मतवाले हाथियोंने मदमत्त गजराजोंको धराशायी कर दिया और घुड़सवारोंने घुड़सवारोंको कुचल डाला ॥ ९ ॥
रथैर्नरा रथा नागैरश्वारोहाश्च पत्तिभिः । अश्वारोहैः पदाताश्च निहता युधि शेरते ॥ १० ॥ रथियोंद्वारा मारे गये पैदल मनुष्य, हाथियोंद्वारा कुचले गये रथ और रथी, पैदलोंद्वारा मारे गये घुड़सवार और घुड़सवारोंद्वारा कालके गालमें भेजे गये पैदल सिपाही उस युद्धभूमिमें सो रहे थे ॥ १० ॥
रथाश्वपत्तयो नागै रथाश्वेभाश्च पत्तिभिः । रथपत्तिद्विपाश्चाश्वै रथैश्चापि नरद्विपाः ॥ ११ ॥ गजों और गजारोहियोंने रथियों, घुड़सवारों और पैदलोंको मार गिराया, पैदलोंने रथियों, घुड़सवारों और हाथीसवारोंको धराशायी कर दिया, घुड़सवारोंने रथियों, पैदलों और गजारोहियोंको मार डाला तथा रथियोंने भी पैदल मनुष्यों और गजारोहियोंको मार गिराया ॥ ११ ॥
रथाश्वेभनराणां तु नराश्वेभरथैः कृतम् । पाणिपादैश्च शस्त्रैश्च रथैश्च कदनं महत् ॥ १२ ॥ पैदल, घुड़सवार, हाथीसवार तथा रथियोंने रथियों, घुड़सवारों, हाथीसवारों और पैदलोंका हाथों, पैरों, अस्त्र-शस्त्रों एवं रथोंद्वारा महान् संहार कर डाला ॥ १२ ॥
तथा तस्मिन् बले शूरैर्वध्यमाने हतेऽपि च । अस्मानभ्याययुः पार्था वृकोदरपुरोगमाः ॥ १३ ॥ इस प्रकार जब शूरवीरोंद्वारा वह सेना मारी जाने लगी और मारी गयी, तब कुन्तीके पुत्रोंने भीमसेनको आगे रखकर हमलोगोंपर आक्रमण किया ॥ १३ ॥
धृष्टद्युम्नः शिखण्डी च द्रौपदेयाः प्रभद्रकाः ।