महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1705, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंपश्य भारत चापानि रुक्मपृष्ठानि धन्विनाम् । महतां चापविद्धानि कलापानिषुधींस्तथा ॥ २९ ॥ ‘भरतनन्दन! देखो, बड़े-बड़े धनुर्धरोंके ये सुवर्णजटित पृष्ठभागवाले धनुष, आभूषण और तरकस पड़े हुए हैं ॥ २९ ॥
जातरूपमयैः पुङ्खैः शरांश्च नतपर्वणः । तैलधौतांश्च नाराचान् विमुक्तानिव पन्नगान् ॥ ३० ॥ ‘सुनहरी पाँखोंसे युक्त झुकी हुई गाँठवाले ये बाण तथा तेलमें धोकर साफ किये हुए नाराच धनुषसे छूटकर सर्पोंके समान पड़े हुए हैं, इनपर दृष्टिपात करो ॥ ३० ॥
आकीर्णांस्तोमरांश्चापि विचित्रान् हेमभूषितान् । चर्माणि चापविद्धानि रुक्मपृष्ठानि भारत ॥ ३१ ॥ ‘भारत! देखो, ये सुवर्णभूषित विचित्र तोमर चारों ओर बिखरे पड़े हैं और ये फेंकी हुई ढालें हैं, जिनके पृष्ठभागपर सोना जड़ा हुआ था ॥ ३१ ॥
सुवर्णविकृतान् प्रासाञ्शक्तीः कनकभूषिताः । जाम्बूनदमयैः पट्टैर्बद्धाश्च विपुला गदाः ॥ ३२ ॥ जातरूपमयीश्चर्ष्टीः पट्टिशान् हेमभूषितान् । दण्डैः कनकचित्रैश्च विप्रविद्धान् परश्वधान् ॥ ३३ ॥ ‘सोनेके बने हुए प्रास, सुवर्णभूषित शक्तियाँ, सोनेके पत्रोंसे जड़ी हुई विशाल गदाएँ, स्वर्णमयी ऋष्टि, सुवर्णभूषित पट्टिश तथा स्वर्णचित्रित दंडोंके साथ बहुत-से फरसे फेंके पड़े हैं, इनपर दृष्टिपात करो ॥ ३२-३३ ॥
परिघान् भिन्दिपालांश्च भुशुण्डीः कुणपानपि । अयस्कुन्तांश्च पतितान् मुसलानि गुरूणि च ॥ ३४ ॥ ‘देखो, ये परिघ, भिन्दिपाल, भुशुण्डी, कुणप, लोहेके बने हुए भाले तथा भारी-भारी मुसल पड़े हुए हैं ॥ ३४ ॥
नानाविधानि शस्त्राणि प्रगृह्य जयगृद्धिनः । जीवन्त इव दृश्यन्ते गतसत्त्वास्तरस्विनः ॥ ३५ ॥ ‘विजयकी अभिलाषा रखनेवाले वेगशाली वीर सैनिक हाथोंमें नाना प्रकारके अस्त्र-शस्त्र लिये प्राणशून्य हो गये हैं तो भी जीवित-से दिखायी देते हैं ॥ ३५ ॥
गदाविमथितैर्गात्रैर्मुसलैर्भिन्नमस्तकान् । गजवाजिरथैः क्षुण्णान् पश्य योधान् सहस्रशः ॥ ३६ ॥ ‘देखो, ये सहस्रों योद्धा हाथी, घोड़ों और रथोंसे कुचल गये हैं। गदाओंके आघातसे इनके अंग चूर-चूर हो गये हैं और मुसलोंकी मारसे मस्तक फट गये हैं ॥ ३६ ॥
मनुष्यगजवाजीनां शरशक्त्यृष्टितोमरैः । निस्त्रिंशैः पट्टिशैः प्रासैर्नखरैर्लगुडैरपि ॥ ३७ ॥