महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 173, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंगजाश्वरथपत्त्योघास्तस्थुः परमंदंशिताः । भूतशर्मा, क्षेमशर्मा, पराक्रमी करकाश, कलिंग, सिंहल, पूर्वदिशाके सैनिक, शूर आभीरगण, दाशेरकगण, शक, यवन, काम्बोज, शूरसेन, दरद, मद्र, केकय तथा हंसपथ नामवाले देशोंके निवासी शूरवीर एवं हाथीसवार, घुड़सवार, रथी और पैदल सैनिकोंके समूह उत्तम कवच धारण करके उस गरुड़के ग्रीवाभागमें खड़े थे ॥
भूरिश्रवास्तथा शल्यः सोमदत्तश्च बाह्लिकः ॥ ८ ॥ अक्षौहिण्या वृता वीरा दक्षिणं पार्श्वमास्थिताः । भूरिश्रवा, शल्य, सोमदत्त तथा बाह्लिक—ये वीरगण अक्षौहिणी सेनाके साथ व्यूहके दाहिने पार्श्वमें स्थित थे ॥ ८ १/२ ॥
विन्दानुविन्दावावन्त्यौ काम्बोजश्च सुदक्षिणः ॥ ९ ॥ वामं पार्श्वं समाश्रित्य द्रोणपुत्राग्रतः स्थिताः । अवन्तीके विन्द और अनुविन्द तथा काम्बोजराज सुदक्षिण—ये बायें पार्श्वका आश्रय लेकर द्रोणपुत्र अश्वत्थामाके आगे खड़े हुए ॥ ९ १/२ ॥
पृष्ठे कलिङ्गाः साम्बष्ठा मागधाः पौण्ड्रमद्रकाः ॥ १० ॥ गान्धाराः शकुनाः प्राच्याः पर्वतीया वसातयः । पृष्ठभागमें कलिंग, अम्बष्ठ, मगध, पौण्ड्र, मद्रक, गन्धार, शकुन, पूर्वदेश, पर्वतीय प्रदेश और वसाति आदि देशोंके वीर थे ॥ १० १/२ ॥
पुच्छे वैकर्तनः कर्णः सपुत्रज्ञातिबान्धवः ॥ ११ ॥ महत्या सेनया तस्थौ नानाजनपदोत्थया । पुच्छभागमें अपने पुत्र, जाति-भाई तथा कुटुम्बके बन्धु-बान्धवोंसहित भिन्न-भिन्न देशोंकी विशाल सेना साथ लिये विकर्तनपुत्र कर्ण खड़ा था ॥ ११ १/२ ॥
जयद्रथो भीमरथः सम्पातिर्ऋषभो जयः ॥ १२ ॥ भूमिंजयो वृषक्राथो नैषधश्च महाबलः । वृता बलेन महता ब्रह्मलोकपुरस्कृताः ॥ १३ ॥ व्यूहस्योरसि ते राजन् स्थिता युद्धविशारदाः । राजन्! उस व्यूहके हृदयस्थानमें जयद्रथ, भीमरथ, सम्पाति, ऋषभ, जय, भूमिंजय, वृषक्राथ तथा महाबली निषधराज बहुत बड़ी सेनाके साथ खड़े थे। ये सब-के-सब ब्रह्मलोककी प्राप्तिको लक्ष्य बनाकर लड़नेवाले तथा युद्धकी कलामें अत्यन्त निपुण थे ॥ १२-१३ १/२ ॥
द्रोणेन विहितो व्यूहः पदात्यश्वरथद्विपैः ॥ १४ ॥ वातोद्भूतार्णवाकारः प्रवृत्त इव लक्ष्यते ।