महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1878, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंसुवीरकं याच्यमाना मद्रिका कर्षति स्फिचौ ॥ ३८ ॥ अदातुकामा वचनमिदं वदति दारुणम् । मा मां सुवीरकं कश्चिद् याचतां दयितं मम ॥ ३९ ॥ पुत्रं दद्यां पतिं दद्यां न तु दद्यां सुवीरकम् । यदि कोई पुरुष मद्रदेशकी किसी स्त्रीसे कांजी माँगता है तो वह उसकी कमर पकड़कर खींच ले जाती है और कांजी न देनेकी इच्छा रखकर यह कठोर वचन बोलती है—'कोई मुझसे कांजी न माँगे, क्योंकि वह मुझे अत्यन्त प्रिय है। मैं अपने पुत्रको दे दूँगी, पतिको भी दे दूँगी; परंतु कांजी नहीं दे सकती' ॥ ३८-३९ १/२ ॥
गौर्यो बृहत्यो निर्ह्रीका मद्रिकाः कम्बलावृताः ॥ ४० ॥ घस्मरा नष्टशौचाश्च प्राय इत्यनुशुश्रुम । मद्रदेशकी स्त्रियाँ प्रायः गोरी, लंबे कदवाली, निर्लज्ज, कम्बलसे शरीरको ढकनेवाली, बहुत खानेवाली और अत्यन्त अपवित्र होती हैं, ऐसा हमने सुन रखा है ॥ ४० १/२ ॥
एवमादि मयान्यैर्वा शक्यं वक्तुं भवेद् बहु ॥ ४१ ॥ आकेशाग्रान्नखाग्राच्च वक्तव्येषु कुकर्मसु । मद्रनिवासी सिरकी चोटीसे लेकर पैरोंके नखाग्रभागतक निन्दाके ही योग्य हैं। वे सब-के-सब कुकर्ममें लगे रहते हैं। उनके विषयमें हम तथा दूसरे लोग भी ऐसी बहुत-सी बातें कह सकते हैं ॥ ४१ १/२ ॥
मद्रकाः सिन्धुसौवीराः धर्मं विद्युः कथं त्विह ॥ ४२ ॥ पापदेशोद्भवा म्लेच्छा धर्माणामविचक्षणाः । मद्र तथा सिन्धु-सौवीर देशके लोग पापपूर्ण देशमें उत्पन्न हुए म्लेच्छ हैं। उन्हें धर्म-कर्मका पता नहीं है। वे इस जगत्में धर्मकी बातें कैसे समझ सकते हैं? ॥ ४२ १/२ ॥
एष मुख्यतमो धर्मः क्षत्रियस्येति नः श्रुतम् ॥ ४३ ॥ यदाजौ निहतः शेते सद्भिः समभिपूजितः । हमने सुना है कि क्षत्रियके लिये सबसे श्रेष्ठ धर्म यह है कि वह युद्धमें मारा जाकर रणभूमिमें सो जाय और सत्पुरुषोंके आदरका पात्र बने ॥ ४३ १/२ ॥
आयुधानां साम्पराये यन्मुच्येयमहं ततः ॥ ४४ ॥ ममैष प्रथमः कल्पो निधने स्वर्गमिच्छतः । मैं अस्त्र-शस्त्रोंद्वारा किये जानेवाले युद्धमें अपने प्राणोंका परित्याग करूँ, यही मेरे लिये प्रथम श्रेणीका कार्य है; क्योंकि मैं मृत्युके पश्चात् स्वर्ग पानेकी अभिलाषा रखता हूँ ॥ ४४ १/२ ॥
सोऽयं प्रियः सखा चास्मि धार्तराष्ट्रस्य धीमतः ॥ ४५ ॥ तदर्थे हि मम प्राणा यच्च मे विद्यते वसु ।