महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1980, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंमहाराज! तत्पश्चात् कुपित हुए भीमसेनने एक भल्लसे विवित्सुका सिर काट लिया। उसका वह कुण्डल और शिरस्त्राणसहित कटा हुआ मस्तक पूर्ण चन्द्रमाके समान पृथ्वीपर गिर पड़ा ॥ १२ १/२ ॥ तं दृष्ट्वा निहतं शूरं भ्रातरः सर्वतः प्रभो ॥ १३ ॥ अभ्यद्रवन्त समरे भीमं भीमपराक्रमम् । प्रभो! उस शूरवीरको मारा गया देख उसके भाई समरभूमिमें भयंकर पराक्रमी भीमसेनपर सब ओरसे टूट पड़े ॥ १३ १/२ ॥ ततोऽपराभ्यां भल्लाभ्यां पुत्रयोस्ते महाहवे ॥ १४ ॥ जहार समरे प्राणान् भीमो भीमपराक्रमः । तब भयानक पराक्रमसे सम्पन्न भीमसेनने उस महायुद्धमें दूसरे दो भल्लोंद्वारा रणभूमिमें आपके दो पुत्रोंके प्राण हर लिये ॥ १४ १/२ ॥ तौ धरामन्वपद्येतां वातरुग्णाविव द्रुमौ ॥ १५ ॥ विकटश्च समश्रूभौ देवपुत्रोपमौ नृप ।