महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1981, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंनरेश्वर! वे दोनों थे विकट (विकटानन) और सम। देवपुत्रोंके समान सुशोभित होनेवाले वे दोनों वीर आँधीके उखाड़े हुए दो वृक्षोंके समान पृथ्वीपर गिर पड़े॥ १५ १/२॥
ततस्तु त्वरितो भीमः क्राथं निन्ये यमक्षयम्॥ १६॥
नाराचेन सुतीक्ष्णेन स हतो न्यपतद् भुवि।
फिर लगे हाथ भीमसेनने क्राथ (क्रथन)-को भी एक तीखे नाराचसे मारकर यमलोक पहुँचा दिया। वह राजकुमार प्राणशून्य होकर पृथ्वीपर गिर पड़ा॥ १६ १/२॥
हाहाकारस्ततस्तीव्रः सम्बभूव जनेश्वर॥ १७॥
वध्यमानेषु वीरेषु तव पुत्रेषु धन्विषु।
जनेश्वर! फिर आपके वीर धनुर्धर पुत्रोंके इस प्रकार वहाँ मारे जानेपर भयंकर हाहाकार मच गया॥ १७ १/२॥
तेषां सुलुलिते सैन्ये पुनर्भीमो महाबलः॥ १८॥
नन्दोपनन्दौ समरे प्रैषयद् यमसादनम्।
उनकी सेना चंचल हो उठी। फिर महाबली भीमसेनने समरांगणमें नन्द और उपनन्दको भी यमलोक भेज दिया॥ १८ १/२॥
ततस्ते प्राद्रवन् भीताः पुत्रास्ते विह्वलीकृताः॥ १९॥
भीमसेनं रणे दृष्ट्वा कालान्तकयमोपमम्।
तदनन्तर आपके शेष पुत्र रणभूमिमें काल, अन्तक और यमके समान भयानक भीमसेनको देखकर भयसे व्याकुल हो वहाँसे भाग गये॥ १९ १/२॥
पुत्रांस्ते निहतान् दृष्ट्वा सूतपुत्रः सुदुर्मनाः॥ २०॥
हंसवर्णान् हयान् भूयः प्रैषयद् यत्र पाण्डवः।
आपके पुत्रोंको मारा गया देख सूतपुत्र कर्णके मनमें बड़ा दुःख हुआ। उसने हंसके समान अपने श्वेत घोड़ोंको पुनः वहीं हँकवाया, जहाँ पाण्डुपुत्र भीमसेन मौजूद थे॥ २० १/२॥
ते प्रेषिता महाराज मद्रराजेन वाजिनः॥ २१॥
भीमसेनरथं प्राप्य समसज्जन्त वेगिताः।
महाराज! मद्रराजके हाँके हुए वे घोड़े बड़े वेगसे भीमसेनके रथके पास जाकर उनसे सट गये॥ २१ १/२॥
स संनिपातस्तुमुलो घोररूपो विशाम्पते॥ २२॥
आसीद् रौद्रो महाराज कर्णपाण्डवयोर्मृधे।
प्रजानाथ! महाराज! युद्धस्थलमें कर्ण और भीमसेनका वह संघर्ष घोर, रौद्र और अत्यन्त भयंकर था॥ २२ १/२॥
दृष्ट्वा मम महाराज तौ समेतौ महारथौ॥ २३॥