महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 203, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंइन्द्रके वज्रके समान जिनका स्पर्श अत्यन्त दुःसह है, जो वीरबहूटीके समान लाल रंगवाले हैं, जिनके शरीरमें विचित्र चिह्न शोभा पाते हैं तथा जो देखनेमें भी अद्भुत हैं, वे घोड़े चित्रायुधको युद्धभूमिमें ले गये ।। बिभ्रतो हेममालास्तु चक्रवाकोदरा हयाः । कोसलाधिपतेः पुत्रं सुक्षत्रं वाजिनोऽवहन् ।। ५७ ।। सुवर्णकी माला धारण किये चक्रवाकके उदरके समान कुछ-कुछ श्वेतवर्णवाले घोड़े कोसलनरेशके पुत्र सुक्षत्रको युद्धमें ले गये ।। ५७ ।। शबलास्तु बृहन्तोऽश्वा दान्ता जाम्बूनदस्रजः । युद्धे सत्यधृतिं क्षैममवहन् प्रांशवः शुभाः ।। ५८ ।। चितकबरे, विशालकाय, वशमें किये हुए, सुवर्णकी मालासे विभूषित तथा ऊँचे कदवाले सुन्दर अश्वोंने क्षेमकुमार सत्यधृतिको युद्धभूमिमें पहुँचाया ।। ५८ ।। एकवर्णेन सर्वेण ध्वजेन कवचेन च । अश्वैश्च धनुषा चैव शुक्लैः शुक्लो न्यवर्तत ।। ५९ ।। जिनके ध्वज, कवच और धनुष—ये सब कुछ एक ही रंगके थे, वे राजा शुक्ल शुक्लवर्णके अश्वोंद्वारा युद्धके मैदानमें लौट आये ।। ५९ ।। समुद्रसेनपुत्रं तु सामुद्रा रुद्रतेजसम् । अश्वाः शशाङ्कसदृशाश्चन्द्रसेनमुदावहन् ।। ६० ।। समुद्रसेनके पुत्र, भयानक तेजसे युक्त चन्द्रसेनको चन्द्रमाके समान सफेद रंगवाले समुद्री घोड़ोंने युद्धभूमिमें पहुँचाया ।। ६० ।। नीलोत्पलसवर्णास्तु तपनीयविभूषिताः । शैब्यं चित्ररथं संख्ये चित्रमाल्याऽवहन् हयाः ।। ६१ ।। नील-कमलके समान रंगवाले, सुवर्णमय आभूषणोंसे विभूषित विचित्र मालाओंवाले अश्व विचित्र रथसे युक्त राजा शैब्यको युद्धस्थलमें ले गये ।। ६१ ।। कलायपुष्पवर्णास्तु श्वेतलोहितराजयः । रथसेनं हयश्रेष्ठाः समूहुर्युद्धदुर्मदम् ।। ६२ ।। जिनके रंग केरावके फूलके समान हैं, जिनकी रोमराजि श्वेतलोहित वर्णकी है, ऐसे श्रेष्ठ घोड़ोंने रणदुर्मद रथसेनको संग्रामभूमिमें पहुँचाया ।। ६२ ।। यं तु सर्वमनुष्येभ्यः प्राहुः शूरतरं नृपम् । तं पटच्चरहन्तारं शुकवर्णाऽवहन् हयाः ।। ६३ ।। जिन्हें सब मनुष्योंसे अधिक शूरवीर नरेश कहा जाता है, जो चोरों और लुटेरोंका नाश करनेवाले हैं, उन समुद्रप्रान्तके अधिपति को तोतेके समान