भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 202, कुल 3237 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 202

कमलके नालकी भाँति श्वेतवर्णवाले और श्येन पक्षीके समान वेगशाली उत्तम एवं विचित्र अश्व सुदामाको लेकर रणक्षेत्रमें उपस्थित हुए ।। ४९ ।।
शशलोहितवर्णास्तु पाण्डुरोद्गतराजयः ।
पाञ्चाल्यं गोपतेः पुत्रं सिंहसेनमुदावहन् ।। ५० ।।
जिनके रंग खरगोशके समान और लोहित हैं तथा जिनके अंगोंमें श्वेत-पीत रोमावलियाँ सुशोभित होती हैं, वे घोड़े उन गोपतिपुत्र पांचालराजकुमार सिंहसेनको* युद्धस्थलमें ले गये थे ।। ५० ।।
पञ्चालानां नरव्याघ्रो यः ख्यातो जनमेजयः ।
तस्य सर्षपपुष्पाणां तुल्यवर्णा हयोत्तमाः ।। ५१ ।।
पांचालोंमें विख्यात जो पुरुषसिंह जनमेजय हैं, उनके उत्तम घोड़े सरसोंके फूलोंके समान पीले रंगके थे ।।
माषवर्णाश्च जवना बृहन्तो हेममालिनः ।
दधिपृष्ठाश्चित्रमुखाः पाञ्चाल्यमवहन् द्रुतम् ।। ५२ ।।
उड़दके समान रंगवाले, स्वर्णमालाविभूषित, दधिके समान श्वेत पृष्ठभागसे युक्त और चितकबरे मुखवाले वेगशाली विशाल अश्व पांचालराजकुमारको संग्रामभूमिमें शीघ्रतापूर्वक ले गये ।। ५२ ।।
शूराश्च भद्रकाश्चैव शरकाण्डनिभा हयाः ।
पद्मकिञ्जल्कवर्णाभा दण्डधारमुदावहन् ।। ५३ ।।
शूर, सुन्दर मस्तकवाले, सरकण्डेके पोरुओंके समान श्वेत-गौर तथा कमलके केसरकी भाँति कान्तिमान् घोड़े दण्डधारको रणभूमिमें ले गये ।। ५३ ।।
रासभारुणवर्णाभाः पृष्ठतो मूषिकप्रभाः ।
वल्गन्त इव संयन्ता व्याघ्रदत्तमुदावहन् ।। ५४ ।।
गदहेके समान मलिन एवं अरुणवर्णवाले, पृष्ठभागमें चूहेके समान श्याम-मलिन कान्ति धारण करनेवाले तथा विनीत घोड़े व्याघ्रदत्तको युद्धमें उछलते-कूदते हुए-से ले गये ।। ५४ ।।
हरयः कालकाश्चित्राश्चित्रमाल्यविभूषिताः ।
सुधन्वानं नरव्याघ्रं पाञ्चाल्यं समुदावहन् ।। ५५ ।।
काले मस्तकवाले, विचित्र वर्ण तथा विचित्र मालाओंसे विभूषित घोड़े पांचालदेशीय पुरुषसिंह सुधन्वाको लेकर रणभूमिमें उपस्थित हुए ।। ५५ ।।
इन्द्राशनिसमस्पर्शा इन्द्रगोपकसंनिभाः ।
काये चित्रान्तराश्चित्राश्चित्रायुधमुदावहन् ।। ५६ ।।