भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

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पृष्ठ 2202

वीरवर! अभी अपने पास साठ हजार मार्गण हैं, दस-दस हजार क्षुर और भल्ल हैं, दो हजार नाराच शेष हैं तथा पार्थ! तीन हजार प्रदर बाकी रह गये हैं ।। १६ ।। अस्त्यायुधं पाण्डवेयावशिष्टं न यद् वहेच्छकटं षड्गवीयम् । एतद् विद्वन् मुञ्च सहस्रशोऽपि गदासिबाहुद्रविणं च तेऽस्ति ।। १७ ।। प्रासाश्च मुद्गराः शक्तयस्तोমরাश्च मा भैषीस्त्वं सङ्क्षयादायुधानाम् ।। १८ ।। पाण्डुनन्दन! अभी इतने आयुध शेष हैं कि छः बैलोंसे जुता हुआ छकड़ा भी उन्हें नहीं खींच सकता। विद्वन्! इन सहस्रों अस्त्रोंका आप प्रयोग कीजिये। अभी तो आपके पास बहुत-सी गदाएँ, तलवारें और बाहुबलकी सम्पत्ति हैं। इसी प्रकार बहुतेरे प्रास, मुद्गर, शक्ति और तोमर बाकी बचे हैं। आप इन आयुधोंके समाप्त हो जानेके डरमें न रहिये ।। १७-१८ ।।

भीमसेन उवाच

सूताद्यैनं पश्य भीमप्रयुक्तैः संछिन्दद्भिः पार्थिवानां सुवेगैः । छन्नं बाणैराहवं घोररूपं नष्टादित्यं मृत्युलोकेन तुल्यम् ।। १९ ।। **भीमसेन बोले—**सूत! आज इस युद्धस्थलकी ओर दृष्टिपात करो। भीमसेनके छोड़े हुए अत्यन्त वेगशाली बाणोंने राजाओंका विनाश करते हुए सारे रणक्षेत्रको आच्छादित कर दिया है, जिससे सूर्य भी अदृश्य हो गये हैं और यह भूमि यमलोकके समान भयंकर प्रतीत होती है ।। १९ ।। अद्यैतद् वै विदितं पार्थिवानां भविष्यति ह्याकुमारं च सूत । निमग्नो वा समरे भीमसेन एकः कुरून् वा समरे व्यजैषीत् ।। २० ।। सूत! आज बच्चोंसे लेकर बूढ़ोंतक समस्त भूपालोंको यह विदित हो जायगा कि भीमसेन समरसागरमें डूब गये अथवा उन्होंने अकेले ही समस्त कौरवोंको युद्धमें जीत लिया ।। २० ।। सर्वे संख्ये कुरवो निष्पतन्तु मां वा लोकाः कीर्तयन्त्वाकुमारम् । सर्वानेकस्तानहं पातयिष्ये