भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 2434, कुल 3237 में से

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पृष्ठ 2434

दुर्योधनो हतो राजा यथोक्तं पाण्डवेन ह ॥ २९ ॥
भग्नसक्थो महाराज शेते पांसुषु रूषितः ।
‘नरेश्वर! समस्त राजा और राजकुमार कालके गालमें चले गये। महाराज! जैसा पाण्डुपुत्र भीमसेनने कहा था, उसके अनुसार राजा दुर्योधन भी मारा गया। उसकी जाँघ टूट गयी और वह धूल-धूसर होकर पृथ्वीपर पड़ा है ॥ २९½ ॥

धृष्टद्युम्नो महाराज शिखण्डी चापराजितः ॥ ३० ॥
उत्तमौजा युधामन्युस्तथा राजन् प्रभद्रकाः ।
पञ्चालाश्च नरव्याघ्र चेदयश्च निषूदिताः ॥ ३१ ॥
‘महाराज! नरव्याघ्र नरेश! धृष्टद्युम्न, अपराजित वीर शिखण्डी, उत्तमौजा, युधामन्यु, प्रभद्रकगण, पांचाल और चेदिदेशीय योद्धाओंका भी संहार हो गया' ॥ ३०-३१ ॥

तव पुत्रा हताः सर्वे द्रौपदेयाश्च भारत ।
कर्णपुत्रो हतः शूरो वृषसेनः प्रतापवान् ॥ ३२ ॥
‘भारत! आपके तथा द्रौपदीके भी सभी पुत्र मारे गये। कर्णका प्रतापी एवं शूरवीर पुत्र वृषसेन भी नष्ट हो गया ॥ ३२ ॥

नरा विनिहताः सर्वे गजाश्च विनिपातिताः ।
रथिनश्च नरव्याघ्र हयाश्च निहता युधि ॥ ३३ ॥
‘नरव्याघ्र! युद्धस्थलमें समस्त पैदल मनुष्य, हाथीसवार, रथी और घुड़सवार भी मार गिराये गये ॥ ३३ ॥

किञ्चिच्छेषं च शिविरं तावकानां कृतं प्रभो ।
पाण्डवानां कुरूणां च समासाद्य परस्परम् ॥ ३४ ॥
‘प्रभो! पाण्डवों तथा कौरवोंमें परस्पर संघर्ष होकर आपके पुत्रों तथा पाण्डवोंके शिबिरमें किंचिन्मात्र ही शेष रह गया है ॥ ३४ ॥

प्रायः स्त्रीशेषमभवज्जगत् कालेन मोहितम् ।
सप्त पाण्डवतः शेषा धार्तराष्ट्रास्त्रयो रथाः ॥ ३५ ॥
‘प्रायः कालसे मोहित हुए सारे जगत्में स्त्रियाँ ही शेष रह गयी हैं। पाण्डवपक्षमें सात और आपके पक्षमें तीन रथी मरनेसे बचे हैं ॥ ३५ ॥

ते चैव भ्रातरः पञ्च वासुदेवोऽथ सात्यकिः ।
कृपश्च कृतवर्मा च द्रौणिश्च जयतां वरः ॥ ३६ ॥
‘उधर पाँचों भाई पाण्डव, वसुदेवनन्दन भगवान् श्रीकृष्ण और सात्यकि शेष हैं तथा इधर कृपाचार्य, कृतवर्मा और विजयी वीरोंमें श्रेष्ठ अश्वत्थामा जीवित हैं ॥ ३६ ॥

तथाप्येते महाराज रथिनो नृपसत्तम ।
अक्षौहिणीनां सर्वासां समेतानां जनेश्वर ॥ ३७ ॥
एते शेषा महाराज सर्वेऽन्ये निधनं गताः ।

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