भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 244, कुल 3237 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 244

आदरणीय महाराज! उस हाथीने बहुत-से हाथियों, रथों और घोड़ोंको कुचलकर यमलोक भेज दिया। यह देख अर्जुनको बड़ा क्रोध हुआ ।। ३० ।।

इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि संशप्तकवधपर्वणि भगदत्तयुद्धे अष्टाविंशोऽध्यायः ।। २८ ।।

इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत संशप्तकवधपर्वमें भगदत्तका युद्धविषयक अट्ठाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ ।। २८ ।।


* भगदत्तके हाथीने जब आक्रमण किया, उस समय श्रीकृष्ण रथको बगलमें हटाकर उसके आघातसे बच गये। अर्जुनने हाथीके सवारोंको सचेत नहीं किया था; उस दशामें हाथीको मारना युद्धके लिये स्वीकृत नियमके विरुद्ध होता। उसमें नियम था—'समाभाष्य प्रहर्तव्यम्'—'विपक्षीको सावधान करके उसके ऊपर प्रहार करना चाहिये।' इसीलिये अर्जुनने धर्मका विचार करके उसे उस समय नहीं मारा।