भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

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पृष्ठ 2442

जैसे सिंह सियारसे लड़कर मारा जाय, उसी प्रकार जहाँ लोकरक्षक प्रतापी वीर भीष्म शिखण्डीसे भिड़कर वधको प्राप्त हुए, जहाँ सम्पूर्ण शस्त्रास्त्रोंकी विद्याके पारंगत विद्वान् ब्राह्मण द्रोणाचार्य पाण्डवोंद्वारा युद्धस्थलमें मार डाले गये, वहाँ भाग्यके सिवा दूसरा क्या कारण हो सकता है? ।। ३०-३१ १/२ ।।

कर्णश्च निहतः संख्ये दिव्यास्त्रज्ञो महाबलः ।। ३२ ।। भूरिश्रवा हतो यत्र सोमदत्तश्च संयुगे । बाह्लिकश्च महाराजः किमन्यद् भागधेयतः ।। ३३ ।। जहाँ दिव्यास्त्रोंका ज्ञान रखनेवाला महाबली कर्ण युद्धमें मारा गया, जहाँ समरांगणमें भूरिश्रवा, सोमदत्त तथा महाराज बाह्लिकका संहार हो गया, वहाँ भाग्यके सिवा दूसरा क्या कारण बताया जा सकता है? ।। ३२-३३ ।।

भगदत्तो हतो यत्र गजयुद्धविशारदः । जयद्रथश्च निहतः किमन्यद् भागधेयतः ।। ३४ ।। जहाँ गजयुद्धविशारद राजा भगदत्त मारे गये और सिंधुराज जयद्रथका वध हो गया, वहाँ भाग्यके सिवा दूसरा क्या कारण हो सकता है? ।। ३४ ।।

सुदक्षिणो हतो यत्र जलसन्धश्च पौरवः । श्रुतायुश्चायुतायुश्च किमन्यद् भागधेयतः ।। ३५ ।। जहाँ काम्बोजराज सुदक्षिण, पौरव, जलसन्ध, श्रुतायु और अयुतायु मार डाले गये, वहाँ भाग्यके सिवा और क्या कारण हो सकता है? ।। ३५ ।।

महाबलस्तथा पाण्ड्यः सर्वशस्त्रभृतां वरः । निहतः पाण्डवैः संख्ये किमन्यद् भागधेयतः ।। ३६ ।। जहाँ सम्पूर्ण शस्त्रधारियोंमें श्रेष्ठ महाबली पाण्ड्यनरेश युद्धमें पाण्डवोंके हाथसे मारे गये, वहाँ भाग्यके सिवा और क्या कारण है? ।। ३६ ।।

बृहद्वलो हतो यत्र मागधश्च महाबलः । उग्रायुधश्च विक्रान्तः प्रतिमानं धनुष्मताम् ।। ३७ ।। आवन्त्यो निहतो यत्र त्रैगर्तश्च जनाधिपः । संशप्तकाश्च निहताः किमन्यद् भागधेयतः ।। ३८ ।। जहाँ बृहद्वल, महाबली मगधनरेश, धनुर्धरोंके आदर्श एवं पराक्रमी उग्रायुध, अवन्तीके राजकुमार, त्रिगर्तनरेश सुशर्मा तथा सम्पूर्ण संशप्तक योद्धा मार डाले गये, वहाँ भाग्यके सिवा दूसरा क्या कारण हो सकता है? ।। ३७-३८ ।।

अलम्बुषो महाशूरो राक्षसश्चाप्यलायुधः । आर्ष्यशृङ्गिश्च निहतः किमन्यद् भागधेयतः ।। ३९ ।। जहाँ शूरवीर अलम्बुष और ऋष्यशृंगपुत्र राक्षस अलायुध मारे गये, वहाँ भाग्यके सिवा और क्या कारण बताया जा सकता है? ।। ३९ ।।