महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2522, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंतेषामापततां तूर्णं पुत्रस्ते भरतर्षभ ।। ३० ।। प्रासेन चेकितानं वै विव्याध हृदये भृशम् । भरतश्रेष्ठ! आपके पुत्रने तुरंत ही एक प्रासका प्रहार करके उन आक्रमणकारी पाण्डव-योद्धाओंमेंसे चेकितानकी छातीपर गहरी चोट पहुँचायी ।। ३० १/२ ।।
स पपात रथोपस्थे तव पुत्रेण ताडितः ।। ३१ ।। रुधिरौघपरिक्लिन्नः प्रविश्य विपुलं तमः । आपके पुत्रद्वारा ताड़ित होकर चेकितान अत्यन्त मूर्च्छित हो रथकी बैठकमें गिर पड़ा। उस समय उसका सारा शरीर खूनसे लथपथ हो गया था ।। ३१ १/२ ।।
चेकितानं हतं दृष्ट्वा पाण्डवेया महारथाः ।। ३२ ।। असक्तमभ्यवर्षन्त शरवर्षाणि भागशः । चेकितानको मारा गया देख पाण्डव महारथी पृथक्-पृथक् बाणोंकी लगातार वर्षा करने लगे ।। ३२ १/२ ।।
तावकानामनीकेषु पाण्डवा जितकाशिनः ।। ३३ ।। व्यचरन्त महाराज प्रेक्षणीयाः समन्ततः । महाराज! विजयसे उल्लसित होनेवाले पाण्डव आपकी सेनाओंमें सब ओर निर्भय विचरते थे। उस समय वे देखने ही योग्य थे ।। ३३ १/२ ।।
कृपश्च कृतवर्मा च सौबलश्च महारथः ।। ३४ ।। अयोधयन् धर्मराजं मद्रराजपुरस्कृताः । तत्पश्चात् कृपाचार्य, कृतवर्मा और महारथी शकुनि मद्रराज शल्यको आगे करके धर्मराज युधिष्ठिरसे युद्ध करने लगे ।। ३४ १/२ ।।
भारद्वाजस्य हन्तारं भूरिवीर्यपराक्रमम् ।। ३५ ।। दुर्योधनो महाराज धृष्टद्युम्नमयोधयत् । राजाधिराज! आपका पुत्र दुर्योधन अत्यन्त बल-पराक्रमसे सम्पन्न द्रोणहन्ता धृष्टद्युम्नके साथ जूझने लगा ।।
त्रिसाहस्रास्तथा राजंस्तव पुत्रेण चोदिताः ।। ३६ ।। अयोधयन्त विजयं द्रोणपुत्रपुरस्कृताः । राजन्! आपके पुत्रसे प्रेरित हो तीन हजार योद्धा अश्वत्थामाको अगुआ बनाकर अर्जुनके साथ युद्ध करने लगे ।। ३६ १/२ ।।
विजये धृतसंकल्पाः समरे त्यक्तजीविताः ।। ३७ ।। प्राविशंस्तावका राजन् हंसा इव महत् सरः । नरेश्वर! जैसे हंस महान् सरोवरमें प्रवेश करते हैं, उसी प्रकार आपके सैनिक समरांगणमें विजयका दृढ़ संकल्प ले प्राणोंका मोह छोड़कर शत्रुओंकी सेनामें जा घुसे ।।