महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2604, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंएको दुर्योधनो ह्यासीत् पुमानिति मतिर्मम ॥ ७ ॥ आपके या शत्रुपक्षके सहस्रों योद्धाओंमें मुझे एकमात्र दुर्योधन ही वीर पुरुष जान पड़ता था ॥ ७ ॥
तत्राद्भुतमपश्याम तव पुत्रस्य विक्रमम् । यदेकं सहिताः पार्था नाभ्यवर्तन्त भारत ॥ ८ ॥ भारत! हमने वहाँ आपके पुत्रका यह अद्भुत पराक्रम देखा कि समस्त पाण्डव एक साथ मिलकर भी उस एकाकी वीरका सामना नहीं कर सके ॥ ८ ॥
युधिष्ठिरं शतेनाजौ विव्याध भरतर्षभ । भीमसेनं च सप्तत्या सहदेवं च पञ्चभिः ॥ ९ ॥ नकुलं च चतुःषष्ट्या धृष्टद्युम्नं च पञ्चभिः । सप्तभिर्द्रौपदेयांश्च त्रिभिर्विव्याध सात्यकिम् ॥ १० ॥ धनुश्चिच्छेद भल्लेन सहदेवस्य मारिष । भरतश्रेष्ठ! उसने युद्धस्थलमें युधिष्ठिरको सौ, भीमसेनको सत्तर, सहदेवको पाँच, नकुलको चौंसठ, धृष्टद्युम्नको पाँच, द्रौपदीके पुत्रोंको सात तथा सात्यकिको तीन बाणोंसे घायल कर दिया। मान्यवर! साथ ही उसने एक भल्ल मारकर सहदेवका धनुष भी काट डाला ॥
तदपास्य धनुश्छिन्नं माद्रीपुत्रः प्रतापवान् ॥ ११ ॥ अभ्यद्रवत राजानं प्रगृह्यान्यन्महद् धनुः । ततो दुर्योधनं संख्ये विव्याध दशभिः शरैः ॥ १२ ॥ प्रतापी माद्रीपुत्र सहदेवने उस कटे हुए धनुषको फेंककर दूसरा विशाल धनुष हाथमें ले राजा दुर्योधनपर धावा किया और युद्धस्थलमें दस बाणोंसे उसे घायल कर दिया ॥
नकुलस्तु ततो वीरो राजानं नवभिः शरैः । घोररूपैर्महेष्वासो विव्याध च ननाद च ॥ १३ ॥ इसके बाद महाधनुर्धर वीर नकुलने नौ भयंकर बाणोंद्वारा राजा दुर्योधनको बींध डाला और उच्चस्वरसे गर्जना की ॥ १३ ॥
सात्यकिश्चैव राजानं शरेणानतपर्वणा । द्रौपदेयास्त्रिसप्तत्या धर्मराजश्च पञ्चभिः ॥ १४ ॥ अशीत्या भीमसेनश्च शरै राजानमर्पयन् । फिर सात्यकिने भी झुकी हुई गाँठवाले एक बाणसे राजाको घायल कर दिया। तदनन्तर द्रौपदीके पुत्रोंने राजा दुर्योधनको तिहत्तर, धर्मराजने पाँच और भीमसेनने अस्सी बाण मारे ॥ १४ १/२ ॥
समन्तात् कीर्यमाणस्तु बाणसंघैर्महात्मभिः ॥ १५ ॥ न चचाल महाराज सर्वसैन्यस्य पश्यतः ।