भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 2641

ते कीर्यमाणा भीमेन पुत्रास्तव महारणे ।। ८ ।।
भीमसेनम्पाकर्षन् प्रवणादिव कुञ्जरम् ।
उस महासमरमें जब भीमसेन आपके पुत्रोंपर बाणोंका प्रहार करने लगे, तब वे भीमसेनको उसी प्रकार दूरतक खींच ले गये, जैसे शिकारी नीचे स्थानसे हाथीको खींचते हैं ।। ८ १/२ ।।

ततः क्रुद्धो रणे भीमः शिरो दुर्मर्षणस्य ह ।। ९ ।।
क्षुरप्रेण प्रमथ्याशु पातयामास भूतले ।
तब रणभूमिमें क्रुद्ध हुए भीमसेनने एक क्षुरप्रसे दुर्मर्षणका मस्तक शीघ्रतापूर्वक पृथ्वीपर काट गिराया ।।

ततोऽपरेण भल्लेन सर्वावरणभेदिना ।। १० ।।
श्रुतान्तमवधीद् भीमस्तव पुत्रं महारथः ।
तत्पश्चात् समस्त आवरणोंका भेदन करनेवाले दूसरे भल्लके द्वारा महारथी भीमसेनने आपके पुत्र श्रुतान्तका अन्त कर दिया ।। १० १/२ ।।

जयत्सेनं ततो विद्ध्वा नाराचेन हसन्निव ।। ११ ।।
पातयामास कौरव्यं रथोपस्थादरिंदमः ।
फिर हँसते-हँसते उन शत्रुदमन वीरने कुरुवंशी जयत्सेनको नाराचसे घायल करके उसे रथकी बैठकसे नीचे गिरा दिया ।। ११ १/२ ।।

स पपात रथाद् राजन् भूमौ तूर्णं ममार च ।। १२ ।।
श्रुतर्वा तु ततो भीमं क्रुद्धो विव्याध मारिष ।
शतेन गृध्रवाजानां शराणां नतपर्वणाम् ।। १३ ।।
राजन्! जयत्सेन रथसे पृथ्वीपर गिरा और तुरंत मर गया। मान्यवर नरेश! तदनन्तर क्रोधमें भरे हुए श्रुतर्वाने गीधकी पाँख और झुकी हुई गाँठवाले सौ बाणोंसे भीमसेनको बींध डाला ।। १२-१३ ।।

ततः क्रुद्धो रणे भीमो जैत्रं भूरिबलं रविम् ।
त्रीनेतांस्त्रिभिरानर्च्छद् विषाग्निप्रतिमैः शरैः ।। १४ ।।
यह देख भीमसेन क्रोधसे जल उठे और उन्होंने रणभूमिमें विष और अग्निके समान भयंकर तीन बाणोंद्वारा जैत्र, भूरिबल और रवि—इन तीनोंपर प्रहार किया ।। १४ ।।

ते हता न्यपतन् भूमौ स्यन्दनेभ्यो महारथाः ।
वसन्ते पुष्पशबला निकृत्ता इव किंशुकाः ।। १५ ।।
उन बाणोंद्वारा मारे गये वे तीनों महारथी वसन्त-ऋतुमें कटे हुए पुष्पयुक्त पलाशके वृक्षोंकी भाँति रथोंसे पृथ्वीपर गिर पड़े ।। १५ ।।

ततोऽपरेण भल्लेन तीक्ष्णेन च परंतपः ।
दुर्विमोचनमाहत्य प्रेषयामास मृत्यवे ।। १६ ।।

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