महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2805, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंविधाताने कार्तिकेयको महामना सुव्रत और सुकर्मा—ये दो लोकविख्यात सेवक प्रदान किये ।। ४२ १/२ ।।
पाणीतकं कालिकं च महामायाविनावुभौ ।। ४३ ।।
पूषा च पार्षदौ प्रादात् कार्तिकेयाय भारत ।
भरतनन्दन! पूषाने कार्तिकेयको पाणीतक और कालिक नामक दो पार्षद प्रदान किये। वे दोनों ही बड़े भारी मायावी थे ।। ४३ १/२ ।।
बलं चातिबलं चैव महावक्त्रौ महाबलौ ।। ४४ ।।
प्रददौ कार्तिकेयाय वायुर्भरतसत्तम ।
भरतश्रेष्ठ! वायु देवताने कृत्तिकाकुमारको महान् बलशाली एवं विशाल मुखवाले बल और अतिबल नामक दो सेवक प्रदान किये ।। ४४ १/२ ।।
यमं चातियमं चैव तिमिवक्त्रौ महाबलौ ।। ४५ ।।
प्रददौ कार्तिकेयाय वरुणः सत्यसङ्गरः ।
सत्यप्रतिज्ञ वरुणने कृत्तिकानन्दन स्कन्दको यम और अतियम नामक दो महाबली पार्षद दिये, जिनके मुख तिमि नामक महामत्स्यके समान थे ।। ४५ १/२ ।।
सुवर्चसं महात्मानं तथैवाप्यतिवर्चसम् ।। ४६ ।।
हिमवान् प्रददौ राजन् हुताशनसुताय वै ।
राजन्! हिमवान्ने अग्निकुमारको महामना सुवर्चा और अतिवर्चा नामक दो पार्षद प्रदान किये ।। ४६ १/२ ।।
काञ्चनं च महात्मानं मेघमालिनमेव च ।। ४७ ।।
ददावनुचरो मेरुरग्निपुत्राय भारत ।
भारत! मेरुने अग्निपुत्र स्कन्दको महामना कांचन और मेघमाली नामक दो अनुचर अर्पित किये ।। ४७ १/२ ।।
स्थिरं चातिस्थिरं चैव मेरुरेवापरौ ददौ ।। ४८ ।।
महात्मा त्वग्निपुत्राय महाबलपराक्रमौ ।
महामना मेरुने ही अग्निपुत्र कार्तिकेयको स्थिर और अतिस्थिर नामक दो पार्षद और दिये। वे दोनों महान् बल और पराक्रमसे सम्पन्न थे ।। ४८ १/२ ।।
उच्छृङ्गं चातिशृङ्गं च महापाषाणयोधिनौ ।। ४९ ।।
प्रददावग्निपुत्राय विन्ध्यः पारिषदावुभौ ।
विन्ध्य पर्वतने भी अग्निकुमारको दो पार्षद प्रदान किये, जिनके नाम थे उच्छृंग और अतिशृंग। वे दोनों ही बड़े-बड़े पत्थरोंकी चट्टानोंद्वारा युद्ध करनेमें कुशल थे ।।
संग्रहं विग्रहं चैव समुद्रोऽपि गदाधरौ ।। ५० ।।
प्रददावग्निपुत्राय महापारिषदावुभौ ।