भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

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पृष्ठ 281

यत्र राज्येप्सवः शूरा बाले शस्त्रमपातयन् ।। २३ ।। धर्मशास्त्रके निर्माताओंने यह क्षत्रिय-धर्म अत्यन्त कठोर बनाया है, जिसमें स्थित होकर राज्यके लोभी शूर-वीरोंने एक बालकपर अस्त्र-शस्त्रोंका प्रहार किया ।। २३ ।।

बालमत्यन्तसुखिनं विचरन्तमभीतवत् । कृतास्त्रा बहवो जघ्नुर्ब्रूहि गावलगणे कथम् ।। २४ ।। संजय! वह अत्यन्त प्रसन्न रहनेवाला बालक जब निर्भय-सा होकर युद्धमें विचर रहा था, उस समय अस्त्रविद्याके पारंगत बहुसंख्यक शूरवीरोंने उसका वध कैसे किया? यह मुझे बताओ ।। २४ ।।

बिभित्सता रथानीकं सौभद्रेणामितौजसा । विक्रीडितं यथा संख्ये तन्ममाचक्ष्व संजय ।। २५ ।। संजय! अमित तेजस्वी सुभद्राकुमारने युद्धके मैदानमें रथियोंकी सेनाको विदीर्ण करनेकी इच्छासे जिस प्रकार युद्धका खेल किया था, वह सब मुझे बताओ ।। २५ ।।

संजय उवाच

यन्मां पृच्छसि राजेन्द्र सौभद्रस्य निपातनम् । तत् ते कात्स्न्येन वक्ष्यामि शृणु राजन् समाहितः ।। २६ ।। **संजयने कहा—**राजेन्द्र! आप जो मुझसे सुभद्राकुमारके मारे जानेका वृत्तान्त पूछ रहे हैं, वह सब मैं आपको पूर्णरूपसे बताऊँगा। राजन्! आप एकाग्रचित्त होकर सुनें ।। २६ ।।

विक्रीडितं कुमारेण यथानीकं बिभित्सता । आरुग्णाश्च यथा वीरा दुःसाध्याश्चापि विप्लवे ।। २७ ।। आपकी सेनाके व्यूहका भेदन करनेकी इच्छासे कुमार अभिमन्युने जिस प्रकार रणक्रीड़ा की थी और उस प्रलयंकर संग्राममें जैसे-जैसे दुर्जय वीरोंके भी पाँव उखाड़ दिये थे, वह सब बता रहा हूँ ।। २७ ।।

दावाग्न्यभिपरीतानां भूरिगुल्मतृणद्रुमे । वनौकसामिवारण्ये त्वदीयानामभूद् भयम् ।। २८ ।। जैसे प्रचुर लता-गुल्म, घास-पात और वृक्षोंसे भरे हुए वनमें दावानलसे घिरे हुए वनवासियोंको महान् भयका सामना करना पड़ता है, उसी प्रकार अभिमन्युसे आपके सैनिकोंको अत्यन्त भय प्राप्त हुआ था ।। २८ ।।

इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि अभिमन्युवधपर्वणि अभिमन्युवधसंक्षेपकथने त्रयस्त्रिंशोऽध्यायः ।। ३३ ।। इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत अभिमन्युवधपर्वमें अभिमन्युवधका संक्षेपसे वर्णनविषयक तैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ।। ३३ ।।