भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

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पृष्ठ 2908

बलसूदन इन्द्रने मायासे वृत्रासुरके तेजको नष्ट कर दिया था, इसलिये भीमसेन भी यहाँ मायामय पराक्रमका ही आश्रय लें।। ६ ।। प्रतिज्ञातं च भीमेन द्यूतकाले धनंजय । ऊरू भेत्स्यामि ते संख्ये गदयेति सुयोधनम् ।। ७ ।। धनंजय! जूएके समय भीमने प्रतिज्ञा करते हुए दुर्योधनसे यह कहा था कि 'मैं युद्धमें गदा मारकर तेरी दोनों जाँघें तोड़ डालूँगा' ।। ७ ।। सोऽयं प्रतिज्ञां तां चापि पालयत्वरिकर्षणः । मायाविनं तु राजानं माययैव निकृन्ततु ।। ८ ।। अतः शत्रुसूदन भीमसेन अपनी उस प्रतिज्ञाका पालन करें और मायावी राजा दुर्योधनको मायासे ही नष्ट कर डालें ।। यद्येष बलमास्थाय न्यायेन प्रहरिष्यति । विषमस्थस्ततो राजा भविष्यति युधिष्ठिरः ।। ९ ।। यदि ये बलका सहारा लेकर न्यायपूर्वक प्रहार करेंगे, तब राजा युधिष्ठिर पुनः बड़ी विषम परिस्थितिमें पड़ जायँगे ।। ९ ।। पुनरेव तु वक्ष्यामि पाण्डवेय निबोध मे । धर्मराजापराधेन भयं नः पुनरागतम् ।। १० ।। पाण्डुनन्दन! मैं पुनः यह बात कहे देता हूँ, तुम उसे ध्यान देकर सुनो। धर्मराजके अपराधसे हमलोगोंपर फिर भय आ पहुँचा है ।। १० ।। कृत्वा हि सुमहत् कर्म हत्वा भीष्ममुखान् कुरून् । जयः प्राप्तो यशः प्राग्रयं वैरं च प्रतियातितम् ।। ११ ।। तदेवं विजयः प्राप्तः पुनः संशयितः कृतः । महान् प्रयास करके भीष्म आदि कौरवोंको मारकर विजय एवं श्रेष्ठ यशकी प्राप्ति की गयी और वैरका पूरा-पूरा बदला चुकाया गया था। इस प्रकार जो विजय प्राप्त हुई थी, उसे उन्होंने फिर संशयमें डाल दिया है ।। ११ १/२ ।। अबुद्धिरेषा महती धर्मराजस्य पाण्डव ।। १२ ।। यदेकविजये युद्धं पणितं घोरमीदृशम् । पाण्डुनन्दन! एककी ही हार-जीतसे सबकी हार-जीतकी शर्त लगाकर जो इन्होंने इस भयंकर युद्धको जूएका दाँव बना डाला, यह धर्मराजकी बड़ी भारी नासमझी है ।। १२ १/२ ।। सुयोधनः कृती वीर एकायनगतस्तथा ।। १३ ।। अपि चोशनसा गीतः श्रूयतेऽयं पुरातनः । श्लोकस्तत्त्वार्थसहितस्तन्मे निगदतः शृणु ।। १४ ।। दुर्योधन युद्धकी कला जानता है, वीर है और एक निश्चयपर डटा हुआ है। इस विषयमें शुक्राचार्यका कहा हुआ यह एक प्राचीन श्लोक सुननेमें आता है, जो नीतिशास्त्रके तात्त्विक