महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2929, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंएकषष्टितमोऽध्यायः
पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि
धृतराष्ट्र उवाच
हतं दुर्योधनं दृष्ट्वा भीमसेनेन संयुगे ।
पाण्डवाः सृञ्जयाश्चैव किमकुर्वत संजय ॥ १ ॥
धृतराष्ट्रने पूछा— संजय! रणभूमिमें भीमसेनके द्वारा दुर्योधनको मारा गया देख पाण्डवों तथा सृञ्जयोंने क्या किया? ॥ १ ॥
संजय उवाच
हतं दुर्योधनं दृष्ट्वा भीमसेनेन संयुगे ।
सिंहेनेव महाराज मत्तं वनगजं यथा ॥ २ ॥
प्रहृष्टमनसस्तत्र कृष्णेन सह पाण्डवाः ।
संजयने कहा— महाराज! जैसे कोई मतवाला जंगली हाथी सिंहके द्वारा मारा गया हो, उसी प्रकार दुर्योधनको भीमसेनके हाथसे रणभूमिमें मारा गया देख श्रीकृष्णसहित पाण्डव मन-ही-मन बड़े प्रसन्न हुए ॥ २ १/२ ॥
पञ्चाला सृञ्जयाश्चैव निहते कुरुनन्दने ॥ ३ ॥
आविद्धयन्नुत्तरीयाणि सिंहनादांश्च नेदिरे ।
नैतान् हर्षसमाविष्टानियं सेहे वसुन्धरा ॥ ४ ॥
कुरुनन्दन दुर्योधनके मारे जानेपर पांचाल और सृंजय तो अपने दुपट्टे उछालने और सिंहनाद करने लगे। हर्षमें भरे हुए इन पाण्डववीरोंका भार यह पृथ्वी सहन नहीं कर पाती थी ॥ ३-४ ॥
धनूंष्यन्ये व्याक्षिपन्त ज्याश्चाप्यन्ये तथाक्षिपन् ।
दध्धुरन्ये महाशङ्खानन्ये जघ्नुश्च दुन्दुभीन् ॥ ५ ॥
किसीने धनुष टंकारा, किसीने प्रत्यंचा खींची, कुछ लोग बड़े-बड़े शंख बजाने लगे और दूसरे बहुत-से सैनिक डंके पीटने लगे ॥ ५ ॥
चिक्रीडुश्च तथैवान्ये जहसुश्च तवाहिताः ।
अब्रुवंश्चासकृद् वीरा भीमसेनमिदं वचः ॥ ६ ॥
आपके बहुत-से शत्रु भाँति-भाँतिके खेल खेलने और हास-परिहास करने लगे। कितने ही वीर भीमसेनके पास जाकर इस प्रकार कहने लगे— ॥ ६ ॥