महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2964, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ें‘महाभाग अश्वत्थामा, सात्वतवंशी कृतवर्मा तथा शरद्वान्के पुत्र कृपाचार्य—इन सबको मेरी यह बात सुना देना ।। २८ १/२ ।।
अधर्मेण प्रवृत्तानां पाण्डवानांमनेकशाः ।। २९ ।।
विश्वासं समयघ्नानां न यूयं गन्तुमर्हथ ।
‘पाण्डवोंने अधर्ममें प्रवृत्त होकर अनेकों बार युद्धकी मर्यादा तोड़ी है; अतः आपलोग कभी उनका विश्वास न करें’ ।। २९ १/२ ।।
वार्तिकांश्चाब्रवीद् राजा पुत्रस्ते सत्यविक्रमः ।। ३० ।।
अधर्माद् भीमसेनेन निहतोऽहं यथा रणे ।
सोऽहं द्रोणं स्वर्गगतं कर्णशल्यावुभौ तथा ।। ३१ ।।
वृषसेनं महावीर्यं शकुनिं चापि सौबलम् ।
जलसन्धं महावीर्यं भगदत्तं च पार्थिवम् ।। ३२ ।।
सोमदत्तं महेष्वासं सैन्धवं च जयद्रथम् ।
दुःशासनपुरोगांश्च भ्रातॄनात्मसमांस्तथा ।। ३३ ।।
दौःशासनिं च विक्रान्तं लक्ष्मणं चात्मजावुभौ ।
एतांश्चान्यांश्च सुबहून् मदीयांश्च सहस्रशः ।। ३४ ।।
पृष्ठतोऽनुगमिष्यामि सार्थहीनो यथाध्वगः ।
इसके बाद आपके सत्यपराक्रमी पुत्र राजा दुर्योधनने संदेशवाहक दूतोंसे इस प्रकार कहा— ‘भीमसेनने रणभूमिमें अधर्मसे मेरा वध किया है। अब मैं स्वर्गमें गये हुए द्रोणाचार्य, कर्ण, शल्य, महापराक्रमी वृषसेन, सुबलपुत्र शकुनि, महाबली जलसन्ध, राजा भगदत्त, महाधनुर्धर सोमदत्त, सिंधुराज जयद्रथ, अपने ही समान पराक्रमी दुःशासन आदि बन्धुगण, विक्रमशाली दुःशासनकुमार और अपने पुत्र लक्ष्मण—इन सबके तथा और भी जो बहुत-से मेरे पक्षके सहस्रों योद्धा मारे गये हैं, उन सबके पीछे मैं स्वर्ग जाऊँगा। मेरी दशा उस पथिकके समान है, जो अपने साथियोंसे बिछड़ गया हो ।। ३०—३४ १/२ ।।
कथं भ्रातॄन् हतान् श्रुत्वा भर्तारं च स्वसा मम ।। ३५ ।।
रोरूयमाणा दुःखार्ता दुःशला सा भविष्यति ।
‘हाय! अपने भाइयों और पतिकी मृत्युका समाचार सुनकर दुःखसे आतुर हो अत्यन्त रोदन करती हुई मेरी बहिन दुःशलाकी क्या दशा होगी? ।। ३५ १/२ ।।
स्नुषाभिः प्रस्नुषाभिश्च वृद्धो राजा पिता मम ।। ३६ ।।
गान्धारीसहितश्चैव कां गतिं प्रतिपत्स्यति ।
‘पुत्रों और पौत्रोंकी बिलखती हुई बहुओंके साथ मेरे बूढ़े पिता राजा धृतराष्ट्र माता गान्धारीसहित किस अवस्थाको पहुँच जायँगे? ।। ३६ १/२ ।।
नूनं लक्ष्मणमातापि हतपुत्रा हतेश्वरा ।। ३७ ।।