भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

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पृष्ठ 3195

थे ॥ १४ ॥ आर्यामार्य सुभद्रां त्वमिमांश्च त्रिदशोपमान् । पितॄन् मां चैव दुःखार्तां विहाय क्व गमिष्यसि ॥ १५ ॥ ‘आर्य! आप माता सुभद्राको, इन देवताओंके समान ताऊ, पिता और चाचाओंको तथा मुझ दुःखातुरा पत्नीको छोड़कर कहाँ जायँगे?’ ॥ १५ ॥ तस्य शोणितदिग्धान् वै केशानुद्धम्य पाणिना । उत्सङ्गे वक्त्रमाधाय जीवन्तमिव पृच्छति ॥ १६ ॥ जनार्दन! देखो, अभिमन्युके सिरको गोदीमें रखकर उत्तरा उसके खूनसे सने हुए केशोंको हाथसे उठा-उठाकर सुलझाती है और मानो वह जी रहा हो, इस प्रकार उससे पूछती है ॥ १६ ॥ स्वस्त्रीयं वासुदेवस्य पुत्रं गाण्डीवधन्वनः । कथं त्वां रणमध्यस्थं जघ्नुरेते महारथाः ॥ १७ ॥ ‘प्राणनाथ! आप वसुदेवनन्दन श्रीकृष्णके भानजे और गाण्डीवधारी अर्जुनके पुत्र थे। रणभूमिके मध्यभागमें खड़े हुए आपको इन महारथियोंने कैसे मार डाला? ॥ १७ ॥ धिगस्तु क्रूरकर्तॄंस्तान् कृपकर्णजयद्रथान् । द्रोणद्रौणायनी चोभौ यैरहं विधवा कृता ॥ १८ ॥ ‘उन क्रूरकर्मा कृपाचार्य, कर्ण और जयद्रथको धिक्कार है, द्रोणाचार्य और उनके पुत्रको भी धिक्कार है! जिन्होंने मुझे इसी उम्रमें विधवा बना दिया ॥ १८ ॥ रथर्षभाणां सर्वेषां कथमासीत् तदा मनः । बालं त्वां परिवार्यैकं मम दुःखाय जघ्नुषाम् ॥ १९ ॥ ‘आप बालक थे और अकेले युद्ध कर रहे थे तो भी मुझे दुःख देनेके लिये जिन लोगोंने मिलकर आपको मारा था, उन समस्त श्रेष्ठ महारथियोंके मनकी उस समय क्या दशा हुई थी? ॥ १९ ॥ कथं नु पाण्डवानां च पञ्चालानां तु पश्यताम् । त्वं वीर निधनं प्राप्तो नाथवान् सन्ननाथवत् ॥ २० ॥ ‘वीर! आप पाण्डवों और पांचालोंके देखते-देखते सनाथ होते हुए भी अनाथकी भाँति कैसे मारे गये? ॥ दृष्ट्वा बहुभिराक्रन्दे निहतं त्वां पिता तव । वीरः पुरुषशार्दूलः कथं जीवति पाण्डवः ॥ २१ ॥ ‘आपको युद्धस्थलमें बहुत-से महारथियोंद्वारा मारा गया देख आपके पिता पुरुषसिंह वीर पाण्डव अर्जुन कैसे जी रहे हैं? ॥ २१ ॥ न राज्यलाभो विपुलः शत्रूणां च पराभवः । प्रीतिं धास्यति पार्थानां त्वामृते पुष्करेक्षण ॥ २२ ॥