भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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तस्मिन् विनिहते शूरे दुराधर्षे महात्मनि । किं नु स्वित् कुरवोऽकार्षुर्मग्नाः शोकसागरे ॥ १० ॥ उन दुर्धर्ष वीर महात्मा भीष्मके मारे जानेपर तो समस्त कुरुवंशी शोकके समुद्रमें डूब गये होंगे; फिर उन्होंने कौन-सा कार्य किया? ।। १० ।।

तदुदीर्णं महत् सैन्यं त्रैलोक्यस्यापि संजय । भयमुत्पादयेत् तीव्रं पाण्डवानां महात्मनाम् ॥ ११ ॥ संजय! महात्मा पाण्डवोंकी वह विशाल एवं प्रचण्ड सेना तो तीनों लोकोंके हृदयमें तीव्र भय उत्पन्न कर सकती है ।। ११ ।।

को हि दौर्योधने सैन्ये पुमानासीन्महारथः । यं प्राप्य समरे वीरा न त्रस्यन्ति महाभये ॥ १२ ॥ उस महान् भयके अवसरपर दुर्योधनकी सेनामें कौन ऐसा वीर महारथी पुरुष था, जिसका आश्रय पाकर समरांगणमें वीर कौरव भयभीत नहीं हुए हैं ।। १२ ।।

देवव्रते तु निहते कुरूणामृषभे तदा । किमकार्षून्नृपतयस्तन्ममाचक्ष्व संजय ॥ १३ ॥ संजय! कुरुश्रेष्ठ देवव्रतके मारे जानेपर उस समय सब राजाओंने कौन-सा कार्य किया? यह मुझे बताओ ।।

संजय उवाच

शृणु राजन्नेकमना वचनं ब्रुवतो मम । यत् ते पुत्रास्तदाकार्षुर्हते देवव्रते मृधे ॥ १४ ॥