महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 352, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंतथा कुछ अन्य महाबली योद्धाओंने अपने चार हाथके धनुष खींचते हुए वहाँ सुभद्रकुमार वीर अभिमन्युपर बाणरूपी जलकी वर्षा प्रारम्भ कर दी ॥ ६ ॥ तांस्तु सर्वान् महेष्वासान् सर्वविद्यासु निष्ठितान् । व्यष्टम्भयद् रणे बाणैः सौभद्रः परवीरहा ॥ ७ ॥ परंतु शत्रुवीरोंका संहार करनेवाले अभिमन्युने सम्पूर्ण विद्याओंमें प्रवीण उन समस्त महाधनुर्धरोंको रणक्षेत्रमें अपने बाणोंद्वारा स्तब्ध कर दिया ॥ ७ ॥ द्रोणं पञ्चाशताविध्यद् विंशत्या च बृहद्बलम् । अशीत्या कृतवर्माणं कृपं षष्ट्या शिलीमुखैः ॥ ८ ॥ रुक्मपुङ्खैर्महावेगैराकर्णसमचोदितैः । अविध्यद् दशभिर्बाणैरश्वत्थामानमार्जुनः ॥ ९ ॥ अर्जुनकुमार अभिमन्युने द्रोणको पचास, बृहद्बलको बीस, कृतवर्माको अस्सी, कृपाचार्यको साठ और अश्वत्थामाको कानतक खींचकर छोड़े हुए स्वर्णमय पंखयुक्त, महावेगशाली दस बाणोंद्वारा घायल कर दिया ॥ स कर्णं कर्णिना कर्णे पीतेन च शितेन च । फाल्गुनिर्द्विषतां मध्ये विव्याध परमेषुणा ॥ १० ॥ अर्जुनकुमारने शत्रुओंके मध्यमें खड़े हुए कर्णके कानमें पानीदार पैने और उत्तम बाणद्वारा गहरी चोट पहुँचायी ॥ १० ॥ पातयित्वा कृपस्याश्वांस्तथोभौ पार्ष्णिसारथी । अथैनं दशभिर्बाणैः प्रत्यविध्यत् स्तनान्तरे ॥ ११ ॥ कृपाचार्यके चारों घोड़ों तथा उनके दो पार्श्विक्षकोंको धराशायी करके छातीमें दस बाणोंद्वारा प्रहार किया ॥ ततो वृन्दारकं वीरं कुरूणां कीर्तिवर्धनम् । पुत्राणां तव वीराणां पश्यतामवधीद् बली ॥ १२ ॥ तदनन्तर बलवान् अभिमन्युने कुरुकुलकी कीर्ति बढ़ानेवाले वीर वृन्दारकको आपके वीर पुत्रोंके देखते-देखते मार डाला ॥ १२ ॥ तं द्रौणिः पञ्चविंशत्या क्षुद्रकाणां समर्पयत् । वरं वरममित्राणामारुजन्तमभीतवत् ॥ १३ ॥ तब शत्रुदलके प्रधान-प्रधान वीरोंका बेखटके वध करते हुए अभिमन्युको अश्वत्थामाने पचीस बाण मारे ॥ स तु बाणैः शितैस्तूर्णं प्रत्यविध्यत मारिष । पश्यतां धार्तराष्ट्राणामश्वत्थामानमार्जुनः ॥ १४ ॥ आर्य! अर्जुनकुमारने भी आपके पुत्रोंके देखते-देखते तुरंत ही अश्वत्थामाको पैने बाणोंद्वारा बींध डाला ॥