भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 353

षष्ट्या शराणां तं द्रौणिस्तिग्मधारैः सुतेजनैः ।
उग्रैर्नाकम्पयद् विद्ध्वा मैनाकमिव पर्वतम् ।। १५ ।।
तब द्रोणपुत्रने तीखी धारवाले तेज और भयंकर साठ बाणोंद्वारा अभिमन्युको बींध डाला; परंतु बींधकर भी वह मैनाक पर्वतके समान स्थित अभिमन्युको कम्पित न कर सका ।। १५ ।।

स तु द्रौणिं त्रिसप्तत्या हेमपुङ्खैरजिह्मगैः ।
प्रत्यविध्यन्महातेजा बलवानपकारिणम् ।। १६ ।।
महातेजस्वी बलवान् अभिमन्युने सुवर्णमय पंखसे युक्त तिहत्तर बाणोंद्वारा अपने अपकारी अश्वत्थामाको पुनः घायल कर दिया ।। १६ ।।

तस्मिन् द्रोणो बाणशतं पुत्रगृद्धी न्यपातयत् ।
अश्वत्थामा तथाष्टौ च परीप्सन् पितरं रणे ।। १७ ।।
तब अपने पुत्रके प्रति स्नेह रखनेवाले द्रोणाचार्यने अभिमन्युको सौ बाण मारे। साथ ही अश्वत्थामाने भी अपने पिताकी रक्षा करते हुए रणक्षेत्रमें उसपर आठ बाण चलाये ।। १७ ।।

कर्णो द्वाविंशतिं भल्लान् कृतवर्मा च विंशतिम् ।
बृहद्बलस्तु पञ्चाशत् कृपः शारद्वतो दश ।। १८ ।।
तत्पश्चात् कर्णने बाईस, कृतवर्माने बीस, बृहद्बलने पचास तथा शरद्वान्‌के पुत्र कृपाचार्यने अभिमन्युको दस भल्ल मारे ।। १८ ।।

तांस्तु प्रत्यवधीत् सर्वान् दशभिर्दशभिः शरैः ।
तैरर्द्यमानः सौभद्रः सर्वतो निशितैः शरैः ।। १९ ।।
उन सबके चलाये हुए तीखे बाणोंद्वारा सब ओरसे पीड़ित हुए सुभद्राकुमारने उन सभीको दस-दस बाणोंसे घायल कर दिया ।। १९ ।।

तं कोसलानामधिपः कर्णिनाताडयद्धृदि ।
स तस्याश्वान् ध्वजं चापं सूतं चापातयत् क्षितौ ।। २० ।।
तत्पश्चात् कोसलनरेश बृहद्बलने एक बाणद्वारा अभिमन्युकी छातीमें चोट पहुँचायी। यह देख अभिमन्युने उनके चारों घोड़ों तथा ध्वज, धनुष एवं सारथिको भी पृथ्वीपर मार गिराया ।। २० ।।

अथ कोसलराजस्तु विरथः खड्गचर्मभृत् ।
इयेष फाल्गुनेः कायाच्छिरो हर्तुं सकुण्डलम् ।। २१ ।।
रथहीन होनेपर कोसलनरेशने हाथमें ढाल और तलवार ले ली तथा अभिमन्युके शरीरसे उसके कुण्डलयुक्त मस्तकको काट लेनेका विचार किया ।। २१ ।।

स कोसलानामधिपं राजपुत्रं बृहद्बलम् ।
हृदि विव्याध बाणेन स भिन्नहृदयोऽपतत् ।। २२ ।।