महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 354, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंइतनेहीमें अभिमन्युने एक बाणद्वारा कोसलनरेश राजपुत्र बृहद्वलके हृदयमें गहरी चोट पहुँचायी। इससे उनका वक्षःस्थल विदीर्ण हो गया और वे गिर पड़े ॥ २२ ॥ बभञ्ज च सहस्राणि दश राज्ञां महात्मनाम् । सृजतामशिवा वाचः खड्गकार्मुकधारिणाम् ॥ २३ ॥ इसके बाद अशुभ वचन बोलनेवाले तथा खड्ग एवं धनुष धारण करनेवाले दस हजार महामनस्वी राजाओंका भी उसने संहार कर डाला ॥ २३ ॥ तथा बृहद्बलं हत्वा सौभद्रो व्यचरद् रणे । व्यष्टम्भयन्महेष्वासो योधांस्तव शराम्बुभिः ॥ २४ ॥ इस प्रकार महाधनुर्धर अभिमन्यु बृहद्वलका वध करके आपके योद्धाओंको अपने बाणरूपी जलकी वर्षासे स्तब्ध करता हुआ रणक्षेत्रमें विचरने लगा ॥ २४ ॥
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि अभिमन्युवधपर्वणि बृहद्वलवधे सप्तचत्वारिंशोऽध्यायः ॥ ४७ ॥ इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत अभिमन्युवधपर्वमें बृहद्वलवधविषयक सैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ४७ ॥