भारतकोश
महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 1076

संवत्सरानृतून् मासान् पक्षानथ लवान् क्षणान् ।। १४ ।। चन्द्रमा तथा तारोंसहित आकाश, नक्षत्र, ग्रह, संवत्सर, ऋतु, मास, पक्ष, लव और क्षणोंकी सृष्टि भी उन्होंने ही की ।। १४ ।।

ततः शरीरं लोकस्थं स्थापयित्वा पितामहः । जनयामास भगवान् पुत्रानुत्तमतेजसः ।। १५ ।। मरीचिमृषिमत्रिं च पुलस्त्यं पुलहं क्रतुम् । वसिष्ठाङ्गिरसौ चोभौ रुद्रं च प्रभुमीश्वरम् ।। १६ ।। तदनन्तर भगवान् ब्रह्माने लौकिक शरीर धारण करके मुनिवर मरीचि, अत्रि, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, वसिष्ठ, अङ्गिरा तथा स्वभाव एवं ऐश्वर्यसे सम्पन्न रुद्र—इन तेजस्वी पुत्रोंको उत्पन्न किया ।। १५-१६ ।।

प्राचेतसस्तथा दक्षः कन्याषष्टिमजीजनत् । ता वै ब्रह्मर्षयः सर्वाः प्रजार्थं प्रतिपेदिरे ।। १७ ।। प्रचेताओके पुत्र दक्षने साठ कन्याओंको जन्म दिया। उन सबको प्रजाकी उत्पत्तिके लिये ब्रह्मर्षियोंने पत्नीरूपमें प्राप्त किया ।। १७ ।।

ताभ्यो विश्वानि भूतानि देवाः पितृगणास्तथा । गन्धर्वाप्सरसश्चैव रक्षांसि विविधानि च ।। १८ ।। पतत्रिमृगमीनाश्च प्लवङ्गाश्च महोरगाः । तथा पक्षिगणाः सर्वे जलस्थलविचारिणः ।। १९ ।। उद्भिदः स्वेदजाश्चैव साण्डजाश्च जरायुजाः । जज्ञे तात जगत् सर्वं तथा स्थावरजङ्गमम् ।। २० ।। उन्हीं कन्याओंसे समस्त प्राणी, देवता, पितर, गन्धर्व, अप्सरा, नाना प्रकारके राक्षस, पशु, पक्षी, मत्स्य, वानर, बड़े-बड़े नाग, जल और स्थलमें विचरनेवाले सब प्रकारके पक्षिगण, उद्भिज्ज, स्वेदज, अण्डज और जरायुज प्राणी उत्पन्न हुए। तात! इस प्रकार सम्पूर्ण स्थावर-जङ्गम जगत् उत्पन्न हुआ ।। १८—२० ।।

भूतसर्गमिमं कृत्वा सर्वलोकपितामहः । शाश्वतं वेदपठितं धर्मं प्रयुयुजे ततः ।। २१ ।। सर्वलोकपितामह ब्रह्माने इन समस्त प्राणियोंकी सृष्टि करके उनके ऊपर वेदोक्त सनातनधर्मके पालनका भार रखा ।। २१ ।।

तस्मिन् धर्मे स्थिता देवाः सहाचार्यपुरोहिताः । आदित्या वसवो रुद्राः ससाध्या मरुदश्विनः ।। २२ ।। आचार्य और पुरोहितगणोंसहित देवता, आदित्य, वसुगण, रुद्रगण, साध्यगण, मरुद्गण तथा अश्विनीकुमार—ये सभी उस सनातन धर्ममें प्रतिष्ठित हुए ।। २२ ।।

भृग्वत्र्यङ्गिरसः सिद्धाः काश्यपाश्च तपोधनाः ।