महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व
Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1381, कुल 2450 में से
संदर्भ में पढ़ेंपरं तत् सर्वधर्मेभ्यस्तेन यान्ति परां गतिम् ।। ७ ।। यह जो ब्रह्मचर्य नामक गुण है, इसे तो शास्त्रोंमें ब्रह्मका स्वरूप ही बताया गया है। यह सब धर्मोंसे श्रेष्ठ है। ब्रह्मचर्यके पालनसे मनुष्य परमपदको प्राप्त कर लेते हैं ।। ७ ।।
लिङ्गसंयोगहीनं यच्छब्दस्पर्शविवर्जितम् । श्रोत्रेण श्रवणं चैव चक्षुषा चैव दर्शनम् ।। ८ ।। वाक्सम्भाषाप्रवृत्तं यत् तन्मनःपरिवर्जितम् । बुद्ध्या चाध्यवसीयेत ब्रह्मचर्यमकल्मषम् ।। ९ ।। वह परमपद पाँच प्राण, मन, बुद्धि और दसों इन्द्रियोंके संघातस्वरूप शरीरके संयोगसे शून्य है, शब्द और स्पर्शसे रहित है। जो कानसे सुनता नहीं, आँखसे देखता नहीं और वाणीद्वारा कुछ बोलता नहीं है, तथा जो मनसे भी रहित है, वही वह परमपद या ब्रह्म है। मनुष्य बुद्धिके द्वारा उसका निश्चय करे और उसकी प्राप्तिके लिये निष्कलंक ब्रह्मचर्यव्रतका पालन करे ।।
सम्यग्वृत्तिर्ब्रह्मलोकं प्राप्नुयान्मध्यमः सुरान् । द्विजाग्र्यो जायते विद्वान् कन्यसीं वृत्तिमास्थितः ।। १० ।। जो मनुष्य इस व्रतका अच्छी तरह पालन करता है, वह ब्रह्मलोक प्राप्त कर लेता है। मध्यम श्रेणीके ब्रह्मचारीको देवताओंका लोक प्राप्त होता है और कनिष्ठ श्रेणीका विद्वान् ब्रह्मचारी श्रेष्ठ ब्राह्मणके रूपमें जन्म लेता है ।। १० ।।
सुदुष्करं ब्रह्मचर्यमुपायं तत्र मे शृणु । सम्प्रदीप्तमुदीर्णं च निगृह्णीयाद् द्विजो रजः ।। ११ ।। ब्रह्मचर्यका पालन अत्यन्त कठिन है। उसके लिये जो उपाय है, वह मुझसे सुनो। ब्राह्मणको चाहिये कि जब रजोगुणकी वृत्ति प्रकट होने और बढ़ने लगे तो उसे रोक दे ।। ११ ।।
योषितां न कथा श्राव्या न निरीक्ष्या निरम्बराः । कथञ्चिद् दर्शनादासां दुर्बलानां विशेद्रजः ।। १२ ।। स्त्रियोंकी चर्चा न सुने। उन्हें नंगी अवस्थामें न देखे; क्योंकि यदि किसी प्रकार नग्नावस्थाओंमें उनपर दृष्टि चली जाती है तो दुर्बल हृदयवाले पुरुषोंके मनमें रजोगुण—राग या कामभावका प्रवेश हो जाता है ।। १२ ।।
रागोत्पन्नश्चरेत् कृच्छ्रं महार्तिः प्रविशेदपः । मग्नः स्वप्ने च मनसा त्रिजपेदघमर्षणम् ।। १३ ।। ब्रह्मचारीके मनमें यदि राग या काम-विकार उत्पन्न हो जाय तो वह आत्मशुद्धिके लिये कृच्छ्रव्रतका³ आचरण करे। यदि वीर्यकी वृद्धि होनेसे उसे कामवेदना अधिक सता रही हो तो वह नदी या सरोवरके जलमें प्रवेश करके