भारतकोश
महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,450 पृष्ठ

पृष्ठ 194, कुल 2450 में से

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पृष्ठ 194

न वोढारं धुरं तस्य कश्चिन्मेने प्रजापतिः ॥ ४२ ॥ न भूतं न भविष्यं च सर्वराजसु संजय । अन्यत्रौशीनराच्छैब्याद् राजर्षेरिन्द्रविक्रमात् ॥ ४३ ॥ ‘संजय! प्रजापति ब्रह्माने इन्द्रके तुल्य पराक्रमी उशीनरपुत्र राजा शिबिके सिवा सम्पूर्ण राजाओंमें भूत या भविष्यकालके दूसरे किसी राजाको ऐसा नहीं माना, जो शिबिका कार्यभार वहन कर सकता हो ॥ ४२-४३ ॥ अदक्षिणमयज्वानं मा पुत्रमनुतप्यथाः । स चेन्ममार संजय चतुर्भद्रतरस्त्वया । पुत्रात् पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथाः ॥ ४४ ॥ ‘संजय! राजा शिबि पूर्वोक्त चारों कल्याणकारी बातोंमें तुमसे बहुत बढ़े-चढ़े थे। तुम्हारे पुत्रसे भी अधिक पुण्यात्मा थे। जब वे भी मर गये तब दूसरेकी क्या बात है, अतः तुम अपने पुत्रके लिये शोक मत करो। उसने न तो कोई यज्ञ किया था, न दक्षिणा ही दी थी; अतः उस पुत्रके लिये शोक नहीं करना चाहिये ॥ ४४ ॥ भरतं चैव दौष्यन्तिं मृतं संजय शुश्रुम । शाकुन्तलं महात्मानं भूरिद्रविणसंचयम् ॥ ४५ ॥ ‘संजय! दुष्यन्त और शकुन्तलाके पुत्र महाधनी महामनस्वी भरत भी मृत्युके अधीन हो गये, यह हमने सुना था ॥ ४५ ॥ यो बद्ध्वा त्रिशतं चाश्वान् देवेभ्यो यमुनामनु । सरस्वतीं विंशतिं च गङ्गामनु चतुर्दश ॥ ४६ ॥ अश्वमेधसहस्रेण राजसूयशतेन च । इष्टवान् स महातेजा दौष्यन्तिर्भरतः पुरा ॥ ४७ ॥ ‘उन महातेजस्वी दुष्यन्तकुमार भरतने पूर्वकालमें देवताओंकी प्रसन्नताके लिये यमुनाके तटपर तीन सौ, सरस्वतीके तटपर बीस और गंगाके तटपर चौदह घोड़े बाँधकर उतने-उतने अश्वमेध यज्ञ किये थे।३ उन्होंने अपने जीवनमें एक सहस्र अश्वमेध और सौ राजसूय यज्ञ सम्पन्न किये थे ॥ ४६-४७ ॥ भरतस्य महत् कर्म सर्वराजसु पार्थिवाः । खं मर्त्या इव बाहुभ्यां नानुगन्तुमशक्नुवन् ॥ ४८ ॥ ‘जैसे मनुष्य दोनों भुजाओंसे आकाशको तैर नहीं सकते, उसी प्रकार सम्पूर्ण राजाओंमें भरतका जो महान् कर्म है, उसका दूसरे राजा अनुकरण न कर सके ॥ ४८ ॥ परं सहस्राद् यो बद्ध्वान् हयान् वेदीर्वितत्य च । सहस्रं यत्र पद्मानां कण्व्याय भरतो ददौ ॥ ४९ ॥ ‘उन्होंने सहस्रसे भी अधिक घोड़े बाँधे और यज्ञ-वेदियोंका विस्तार करके अश्वमेध यज्ञ किये। उसमें भरतने आचार्य कण्वको एक हजार सुवर्णके बने हुए कमल भेंट